लोंगेवाला युद्ध: 'शहीद' लेफ्टिनेंट धरमवीर रोक सकते थे ‘बॉर्डर’ फिल्म को रिलीज होने से!

लोंगेवाला युद्ध: 'शहीद' लेफ्टिनेंट धरमवीर रोक सकते थे ‘बॉर्डर’ फिल्म को रिलीज होने से!

By: shailendra shukla
December 03, 15:12
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New Delhi: 1971 में हुई लोंगेवाला की लड़ाई आप लोगों को याद है या नहीं? अगर नहीं याद है तो ‘बॉर्डर’ फिल्म देख लीजिए सारी बाते क्लियर हो जाएंगी सिर्फ एक बात छोड़कर की कितने जवान शहीद हुए थे।

फिल्म में लेफ्टिनेंट धरमवीर, सुबेदार रतन सिंह, बीएसएफ के कमांडेंट भैरव सिंह समेत कई सैन्यकर्मियों को शहीद दिखाया गया है लेकिन ऐसा नहीं था। देश के वीर सपूतों ने इस जंग को जान देकर नहीं जान लेकर जीती थी वह भी पूरे जोश के साथ। 

लेफ्टिनेंट धरमवीर का किरदार अक्षय खन्ना ने निभाया था और उन्हें फिल्म में शहीद दिखाया गया जबकि ऐसा नहीं हुआ था

लेफ्टिनेंट धरमवीर का किरदार अक्षय खन्ना ने बखूबी निभाया था। लेकिन फिल्म में उन्हें शहीद दिखाया गया है। जब फिल्म मेकर जेपी दत्ता सेंसर बोर्ड से सर्टिफिकेट लेने के लिए पहुंचे तो ‘बॉर्डर’ को सेंसर बोर्ड ने सर्टिफिकेट देने से मना कर दिया। सेंसर बोर्ड ने आपत्ति जताई कि जब लेफ्टिनेंट धरमवीर शहीद नहीं हुए थे तो उन्हें कैसे शहीद कर दिया आपने?

बेचारे जेपी दत्ता को अपनी गलती समझ में आ गई लेकिन फिल्म शूट की जा चुकी थी और एडिटिंग भी हो गई थी ऐसे में फिर से वही मेहनत! आसान नहीं था। ऐसे में दत्ता ने लेफ्टिनेंट धरमवीर के सामने सरेंडर करना उचित समझा। उन्होंने धर्मवीर को कॉल किया और बताया कि उन्होंने उन्हें बॉर्डर फिल्म में शहीद दिखाया है इसलिए सेंसर बोर्ड फिल्म ‘बॉर्डर’ को पास नहीं कर रहा है। दूसरी तरफ फोन लाइन पर लेफ्टिनेंट धरमवीर ने सवाल किया कि दत्ता साहब! इसमें मैं आपकी क्या मदद कर सकता हूं? आपने मुझसे जानकारी मांगी मैने आपको दी... अब मैं यहां आपकी क्या मदद करूंगा? 

लेफ्टिनेंट धर्मवीर ने सेंसर बोर्ड को तुरंत फैक्स भेजा था तब फिल्म को सर्टिफिकेट मिल सका (फाइल फोटो-लेफ्टिनेंट धरमवीर सिंह)


जेपी दत्ता ने उन्हें उनकी ‘शहादत’ का ‘प्रमाण-पत्र’ देने को कहा। यानि कि आप (लेफ्टिनेंट धरमवीर) लिखकर दे दीजिए कि आपको इस बात पर आपत्ति नहीं है कि आपको फिल्म में शहीद दिखाया गया है।

अमूनन ऐसा आम आदमी से बोला जाता तो वह हल्ला मचा देता। भाई जाहिर से बात है आप किसी से कहोगे कि उसने आपको मरा साबित किया है इसपर वह आपत्ति न जताए तो क्या वह आपका साथ देगा? नहीं ना! लेकिन फोन पर दूसरी तरफ लेफ्टिनेंट धरमवीर हंसने लगे और बोले –दत्ता साहब मैं अभी जिंदा हूं यार! अपनी मौत से जुड़ी बातों पर मैं कैसे नहीं आपत्ति जाहिर करूं? 

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जब दत्ता और धरमवीर के बीच फोन पर बात हो रही थी तो धरमवीर की पत्नी सब बात सुन रही थीं। जब पति लेफ्टिनेंट धरमवीर से उनकी पत्नी ने सारी बात पूछी तो वह बात बताते-बताते हंसने लगे। इस पर उनकी पत्नी ने कहा कि आप फैक्स भेजिए सेंसर बोर्ड को कि उन्हें इस बात पर कोई आपत्ति नहीं है कि उन्हें फिल्म में शहीद दिखाया गया है। जिसके बाद लेफ्टिनेंट धरमवीर ने सेंसर बोर्ड को ‘नो ऑब्जेक्शन’ फैक्स भेजा तब जाकर फिल्म को सर्टिफिकेट मिल सका।

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फिलहाल लेफ्टिनेंट धरमवीर सेवा निवृत हो चुके हैं और वह गुरुग्राम में अपने परिवार के साथ रहते हैं। लेफ्टिनेंट धरमवीर सिंह शिकायत भरे लहजे में कहते हैं कि उनके ‘नो ऑब्जेक्शन’ लेटर स  जेपी दत्ता की फिल्म ‘बॉर्डर’ को तुरंत सर्टिफिकेट मिल गया लेकिन सामनेवाले ने उन्हें कभी भी फिल्म के प्रमोशन में नहीं बुलाया और न ही फिल्म के इवेंट में और इसलिए मैं फेमस नहीं हो सका। लेकिन मुझे इस बात का कोई अफसोस नहीं हैं। मैं एक सिपाही हूं और उस इतिहास का पल हूं यही मेरे लिए काफी है।
 

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