छेड़खानी की शिकार हुई लड़कियों के कपड़े जमा करती है ये महिला, जानिए क्या है वजह

छेड़खानी की शिकार हुई लड़कियों के कपड़े जमा करती है ये महिला, जानिए क्या है वजह

By: Naina Srivastava
January 14, 15:01
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New Delhi: बैंगलोर की जैस्मीन पथेजा(Jasmeen Patheja) लोगों को समझाने की कोशिश कर रही है कि इस क्राइम का लेना-देना पहनावे से नहीं है।

आज के समय में लड़कियों के साथ छेड़छाड़ और रेप होना एक सबसे बड़ी समस्या बनकर सामने आ रही है। हमारा देश हर चीज में तरक्की कर रहा है, लेकिन इसे देखकर लगता है कि इतना तरक्की करने के बाद भी लड़कियां कही भी सहीं नहीं है। जब ऐसे मामले सामने आते है तो सबसे पहले एक ही सवाल आता है कि उसके पहनावे के कारण वह इसका शिकार हुई। जो कि बहुत की तकलीफदेय होता है। इस तकलीफ को समझ कर बैंगलोर की जैस्मीन पथेजा ने ये कदम उठाया है। 

जैस्मीन एक आर्टिस्ट एंड एक्टिविस्ट है। वह अपने घर के एक भाग को म्यूजियम के रुप में बदल चुकी है। जिसमें दर्जनों ऐसे कपड़े होगे। जो कि छेड़खानी से शिकार हो चुकी लड़कियों के है। जैस्मीन के इस कलेक्शन में एक रेड और ब्लैक कलर का जंकसूट है। जो बैंगलोर में हुए लास्ट ईयर न्यू ईयर सेलीब्रेशन में हुए छेड़खानी का है।

जैस्मीन ने बताया कि यह ड्रेस उस लड़की की है। जो कि उस दिन refuge की छेड़खानी का शिकार हुई थी। उसने सबकुछ बताया उसके साथ कैसे क्या हुआ।यहां पर मौजूद कपड़े ऐसे है जो कि आम लड़कियां पहनती है, लेकिन इन सभी ड्रेसेस की एक कहानी है। आपको यहां पर छेड़खानी से शिकार हुई सैकड़ो लड़किय़ों के कपड़े मिल जाएगे।

जैस्मीन के कलेक्शन में स्कूल यूनिफार्म, गाउल, जंकसूट जैसे कपड़े शामिल है। जिन्हें देखकर आप समझ जाएंगे कि छेड़खानी की शिकार महिलाओं के है। जिन्हें देखकर आपको इस बात को मान लेगें कि छेड़खानी का शिकार होने वाली लड़कियों के पीछे उनके कपड़े नहीं है।
जैस्मीन ने अपने इस कैंपेन का नाम रखा है 'I Never Ask For It'।

ये है कहानी जैस्मीन की

सेक्सुअल और लिंग के अनुसार हिंसा के खिलाफ उनकी लड़ाई लगभग डेढ़ साल पहले शुरू हुई थी, जब वह उत्तरी कोलकाता (कलकत्ता) से कला का अध्ययन करने के लिए बेंगलुरु गई थी।कोलकाता में छेड़खानी के मामले कम थे। लेकिन जब में बैंगलोर गई तो मेरी उम्र 23 साल थी। मेरे साथ कोई परिवार का सदस्य नहीं था जो कि मेरे सुरक्षा में साथ हो।एक ऐसा समय था जब लड़के लड़कियों को सड़को में छेड़ देते थे और वह कुछ नहीं बोलती थी। इसकी के कारण इसको लेकर एक स्टैंड लेना जरुरी थी। इसीलिए इस चुप्पी को तोड़ने के लिए एक वार्तालाप करने की कोशिश की।

एक दिन एक रुम में मैने सभी फीमेल स्टूडेंट्स को पाया और कहा, "आइए शब्दों के साथ आओ, जो एक सार्वजनिक स्थान का आह्वान करते हैं।' तीन मिनट में, हमारे पास केवल नकारात्मक शब्दों का विशाल मन था।"  इसका रिजल्ट आश्चर्य करने वाला था। पब्लिक में छेड़छाड़ सभी के साथ हुई थी। सभी ने अपने बारें में बाताया कि उन्हें कैसे कब क्या हुआ। किसी ने बताया कि रात होने के कारण, किसी ने बताया कपड़ो के कारण उनके साथ छेड़छाड़ हुई।इसी कारण जैस्मीन ने साल 2003 में 'the Blank Noise collective' शुरु किया। जो कि अब भी लगातार चल रहा है और जिससे न जाने कितने लोग जुड़ रहे है। 

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