ढाँचा तोड़ते तोड़ते कारसेवक टूट पड़े पत्रकारों पर, किसी को बनाया बंधक तो किसी का तोड़ा Camera

ढाँचा तोड़ते तोड़ते कारसेवक टूट पड़े पत्रकारों पर, किसी को बनाया बंधक तो किसी का तोड़ा Camera

By: Naina Srivastava
December 06, 08:12
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New Delhi: 6 दिसंबर, 1992 को अयोध्या में जो कुछ हुआ उसके फलस्वरुप मुंबई और दिल्ली सहित कई प्रमुख भारतीय शहरों में 2,000 से अधिक लोग मारे गये। यही नहीं लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहे जाने वाली मीडिया भी इस हिंसा की आग से नहीं बच पाई थी। 

उस रोज पूरे हालात को कवर कर रहे पत्रकारों को भी भीड़ ने नहीं बख्सा, उनके साथ मारपीट की। उनके कैमरे तोड़े गए और ना जाने क्या क्या किया गया था। देश ही नहीं विदेशी पत्रकार भी ये दिन नहीं भूल सकते। वैसे तो इस बड़ी घटना को कई पत्रकार कवर कर रहे थे। लेकिन एक पत्रकार ऐसा भी था जिसने बाबरी मस्जिद विध्वंस को बहुत करीब से देखा। जो विध्वंस का एक एक  पल का गवाह था। उसका नाम था मार्क टली...सर मार्क टली। मार्क टली ने बताई बाबरी विध्वंस की कहानी खुद अपनी जुबानी..

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बाबरी मस्जिद

मार्क टली ने कहा 6 दिसंबर 1992 को मैं एक ऐसी इमारत की छत पर खड़ा था जहां से बाबरी मस्जिद साफ नजर आ रही थी। यह वही दिन था जब भारतीय जनता पार्टी और उसके समर्थक कुछ अन्य संगठनों ने राम मंदिर निर्माण का काम शुरू करने ऐलान किया था। हालांकि उन्होंने सरकार और अदालतों से वादा किया था कि यह सिर्फ प्रतीकात्मक धार्मिक अनुष्ठान होगा और मस्जिद को कोई नुकसान नहीं पहुंचाया जाएगा।

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वहां करीब डेढ़ लाख लोग मौजूद थे जो भाजपा और विश्व हिंदू परिषद के नेताओं के भाषण सुन रहे थे। वहां मौजूद नेताओं में लाल कृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी भी शामिल थे। जब हम खड़े थे उसके ठीक नीचे सिर पर चमकीली पीले वस्त्र बांधे कुछ नौजवानों ने बैरियर को लांघ कर मस्जिद की ओर बढ़ने की कोशिश की और सारा मामला तभी शुरू हुआ। पुलिसकर्मी खड़े रहे और देखते रहे। हालांकि आयोजनकर्ताओं द्वारा भीड़ को नियंत्रित करने के लिए नियुक्त किए गए सिर पर भगवा वस्त्र बांधे कुछ लोगों ने उन्हें रोकने की कोशिश जरूर की थी। लेकिन थोड़ी देर बाद उन्होंने भी चुप्पी साध ली और जल्दी ही वे हुड़दंगियों की भीड़ में शामिल हो गए।


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इसके बाद इस भीड़ ने टेलीविज़न के लिए काम करने वाले पत्रकारों को पीटना शुरू किया। भीड़ ने कैमरामैनों से कैमरे छीन लिए और उन्हें तोड़ डाला। इस घटना से आसपास के पेड़ों पर चढ़े युवक उत्साहित हो गए और उन्होंने सभी बाड़ों को तोड़ दिया और मस्जिद की ओर बढ़ने लगे। भीड़ के इस सैलाब को देखकर मस्जिद के पास जो थोड़े-बहुत पुलिसकर्मी खड़े थे, वे भी पीछे हटने लगे। भीड़ इन पुलिसकर्मियों पर पत्थर बरसाने लगी और वे पत्थरों से बचने की कोशिश करते हुए पीछे हटे। तभी दो नौजवान मस्जिद की बीच वाले गुंबद पर चढ़ गए और इसे तोड़ने लगे। इसके बाद गुबंदों पर कई लोग चढ़ गए।

BBC ने सबसे पहले तोड़फोड़ की खबर दी थी। क्योंकि अयोध्या से टेलीफ़ोन लाइनें काट दी गई थीं इसलिए BBC के लिए अपनी ख़बर देने के लिए मैं गाड़ी से फैजाबाद गया। वहां से ख़बर देने के बाद जब मैं वापस अयोध्या आया तो मुझे और मेरे साथ मौजूद हिंदी के कुछ पत्रकारों को पहले तो कारसेवकों ने धमकाया और बाद में हमें एक कमरे में बंद कर दिया। हमें उस कमरे में कई घंटों तक बंद करके रखा गया था। बाद में अयोध्या के जाने-माने मंदिरों में से एक के प्रमुख पुजारी एक स्थानीय अधिकारी के साथ हमें छुड़ाने आए। जब हम बाहर आए तब हमने देखा कि बाबरी मस्जिद पूरी तरह से ध्वस्त हो चुकी थी। 


 

आपको बता दें मार्क टली बीबीसी के सबसे लोकप्रिय पत्रकारों में से एक हैं। उन्होंने कई दशकों तक भारत से बीबीसी के लिए रिपोर्टिंग की है। मार्क टली करीब चार दशकों से ज्यादा समय तक ब्रिटिश ब्रॉडकॉस्टिंग कॉर्पोरेशन (बीबीसी) के दक्षिण एशिया संवाददाता और ब्यूरो प्रमुख रहे हैं। मार्क टली भारत की बीते बीस-तीस बरसों की बड़ी घटनाओं के वे गवाह रहे हैं। चाहे अयोध्या में विवादित ढांचे को ध्वस्त किया जाना हो या इससे पहले स्वर्ण मंदिर में सैन्य कार्रवाई।

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