बाबरी बरसी: 25 साल बाद भी सिसक रही अयोध्या, महज 6 घंटे में हिल गया था पूरा देश

बाबरी बरसी: 25 साल बाद भी सिसक रही अयोध्या, महज 6 घंटे में हिल गया था पूरा देश

By: Naina Srivastava
December 06, 08:12
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New Delhi: 6 दिसंबर 2017 विवादित ढांचा गिराए जाने की 25वीं बरसी है। आज ही के दिन अयोध्या में इतना खून बहा था कि भगवान राम भी कटघरे में बंद हो गए। करीब 25 साल पहले तोड़ा गया विवादित ढांचा आज भी राजनीति और समाज में एक संवेदनशील मुद्दा है। 

विवादित ढांचा विध्वंस होने की घटना को आज पूरे 25 बरस हो गए हैं। जानें कैसे 6 दिसंबर 1992 को 6 घंटे में पूरा देश हिल गया था। 6 दिसंबर 1992 को उत्तर प्रदेश के अयोध्या में विवादित ढ़ांचा गिरने के बाद दो समुदायों के बीच तनाव की घटना सामने आई। इस विवाद के कारण यूपी के कई शहरों में कर्फ्यू लगाया गया।

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यह विवाद उन दावों से शुरू हुआ जिसमें एक पक्ष के लोग यह दावा कर रहे थे कि यहां स्तिथ बाबरी मस्जिद एक मंदिर को तोड़कर बनाया गया है, जबकि दूसरा पक्ष इस दलील को मानने से इंकार करता है। दोनों पक्षों के इसी विवाद की वजह से 6 दिसंबर 1992 को यह विवादित ढ़ांचा यानि बाबरी मस्जिद गिरा दी गई।

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उत्तर प्रदेश में BJP की सरकार बनने के बाद से ही राम की नगरी अयोध्या लगातार सुर्खियों में है। विवादित राम जन्म भूमि को लेकर एक तरफ जहां सर्वोच्च न्यायालय में सुनवाई हो रही है, वहीं दूसरी ओर बाबरी विध्वंस की 25वीं बरसी के मद्देनजर प्रशासन हाई अलर्ट पर है। बता दें कि हजारों कार सेवकों की उन्‍मादी भीड़ ने 6 दिसंबर, 1992 को विवादित ढांचा को ध्‍वस्‍त कर दिया।

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इसकी सुरक्षा की जिम्‍मेदारी तत्‍कालीन राज्‍य सरकार ने ली थी लेकिन वह इसे पूरा नहीं कर सकी। इस घटना को 25 बरस गुजर गए हैं लेकिन आज भी इस मुद्दे की गूंज भारत की राजनीति में सुनाई देती है। बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद मुंबई और दिल्ली सहित कई प्रमुख भारतीय शहरों में  दंगों में 2,000 से अधिक लोग मारे गए थे।

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उस रोज पूरे हालात को कवर कर रहे पत्रकारों को भी भीड़ ने नहीं बख्सा, उनके साथ मारपीट की। उनके कैमरे तोड़े गए और ना जाने क्या क्या किया गया था। देश ही नहीं विदेशी पत्रकार भी ये दिन नहीं भूल सकते। वैसे तो इस बड़ी घटना को कई पत्रकार कवर कर रहे थे। लेकिन एक पत्रकार ऐसा भी था जिसने बाबरी मस्जिद विध्वंस को बहुत करीब से देखा। जो विध्वंस का एक एक  पल का गवाह था। उसका नाम था मार्क टली।

क्या है राम मंदिर आंदोलन?

राम मंदिर मुद्दा 1989 के बाद अपने उफान पर था। इस मुद्दे की वजह से तब देश में साम्प्रदायिक तनाव फैला था। देश की राजनीति इस मुद्दे से प्रभावित होती रही है। हिंदू संगठनों का दावा है कि अयोध्या में भगवान राम की जन्मस्थली पर बाबरी मस्जिद बनी थी। मंदिर तोड़कर यह मस्जिद बनवाई गई थी। जबकि देश के मुसलमानों की पाक बाबरी मस्जिद भी विवादित स्थल पर स्थित है। भारत के प्रथम मुगल सम्राट बाबर के आदेश पर 1527 में इस मस्जिद का निर्माण किया गया था। बाबर ने अपने जनरल मीर बांकी को क्षेत्र का वायसराय नियुक्त किया। मीर बांकी ने अयोध्या में वर्ष 1528 में बाबरी मस्जिद का निर्माण कराया। इस बारे में कई तह के मत प्रचलित हैं कि जब मस्जिद का निर्माण हुआ तो मंदिर को नष्ट कर दिया गया या बड़े पैमाने पर उसमें बदलाव किएगए।

कई वर्षों बाद आधुनिक भारत में हिंदुओं ने फिर से राम जन्मभूमि पर दावे करने शुरू किया जबकि देश के मुसलमानों ने विवादित स्थल पर स्थित बाबरी मस्जिद का बचाव करना शुरू किया। प्रमाणिक किताबों के अनुसार दोबारा इस विवाद की शुरुआत सालों बाद साल 1987 में हुई। साल 1940 से पहले मुसलमान इस मस्जिद को मस्जिद-ए-जन्मस्थान कहते थे, इस बात के भी प्रमाण मिले हैं। राम मंदिर आंदोलन के दौरान 6 दिसंबर, 1992 को अयोध्या में बाबरी मस्जिद का विवादित ढांचा गिरा दिया गया था। मामला अब सुप्रीम कोर्ट में है।

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