सर्जिकल स्ट्राइक को आज एक साल पूरे हुए, PM मोदी का था प्लान, जानिए कैसे बनाई थी योजना

सर्जिकल स्ट्राइक को आज एक साल पूरे हुए, PM मोदी का था प्लान, जानिए कैसे बनाई थी योजना

By: Adill Malik
September 28, 12:09
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New Delhi:

PoK में की गई भारतीय सेना की सर्जिकल स्ट्राइक को एक साल आज पूरा हो गया है। इस मौके पर रक्षामंत्री निर्मला सीतारमण सेना आर्मी चीफ जनरल बिपिन रावत के साथ कश्मीर दौरे पर रहेगी और उरी कैंप भी जाएगी जहां आतंकवादियों ने हमला किया था ।

बता दें कि आतंकवादियों ने 19 सितंबर 2016 को उरी बेस कैंप पर हमला किया था, जिसमें 19 जवान शहीद हो गए थे। मारे गए आतंकवादियों के पास से जीपीएस सेट और जिंदा कारतूस भारी मात्रा में बरामद किए गए थे। पाक से आए आतंकियों का ताल्लुक जैश-ए-मोहम्मद से था। जिसके जवाब में भारतीय सेना के द्वारा की गई सर्जिकल स्ट्राइक में करीब 50 आतंकी मारे गए थे। और कई आतंकी कैंप पूरी तरह से तबाह भी हुए थे। ये भी पहली बार हुआ था कि भारतीय सेना ने पाकिस्तानी कैंपों पर हमला किया और इसका एलान भी किया गया था।

पीएम मोदी ने की थी सर्जिकल स्ट्राइक की पूरी प्लानिंग- जानिए

22 सितंबर, 2016 को दिल्ली में आर्मी चीफ जनरल दलबीर सिंह सुहाग और डायरेक्टर जनरल मिलिट्री ऑपरेशन लेफ्टिनेंट जनरल रनबीर सिंह ने योजना बनाई। NSA अजीत डोभाल के साथ तीनों ने पाकिस्तान के खिलाफ मिलिट्री और दूसरे ऑपरेशन की जानकारी PM मोदी को दी। फिर अगले दिन प्रधानमंत्री मोदी अजित डोभाल के साथ पहली बार साउथ ब्लॉक पर आर्मी के अंडरग्राउंड वॉर रूम में पहुंचे। वहां सेना के तीनों प्रमुख, खुफिया एजेंसी रॉ के सेक्रेटरी राजेंद्र कुमार, इंटेलिजेंस ब्यूरो के डायरेक्टर दिनेश्वर शर्मा और एनटीआरओ चीफ आलोक जोशी पहले से मौजूद थे।

यहां प्रधानमंत्री को बताया गया कि इसरो की कम ऊंचाई वाले सेटेलाइट के जरिए पाक अधिकृत कश्मीर पर पूरी नजर रखी जा रही है। मानव रहित विमान से PoK के टेरर लॉन्चिंग पैड की भी निगरानी की जा रही है। इसके अलावा रॉ के लोग जमीन पर भी ऐसे आठ टेरर लॉन्च पैड की जानकारी जुटा रहे हैं। इसी के बाद मीटिंग में फैसला हुआ कि इन आठ टेरर कैंपों पर नजर रखी जाए और उसके बारे में तमाम अपडेट दिए जाएं। LoC पर पैनी नजर रखी जा रही थी। खुफिया एजेंसी रॉ के भरोसेमंद एजेंट रावलपिंडी और इस्लामाबाद की हर गतिविधियों पर नजरें रखे थे। रावलपिंडी और पाकिस्तान से रॉ ने गुप्त संदेश भेजे, जो मिशन को आगे बढ़ाने में अहम कड़ी साबित हुए।

26 सितंबर, 2016 दिल्ली में तीनों सेना प्रमुख और खुफिया एजेंसियों के हेड अपना-अपना मोबाइल फोन स्विच ऑफ कर देते हैं, ताकि उनके फोन से पाकिस्तान उनके मूवमेंट का पता ना लगा सके। रायसीना हिल से कोसों दूर एक खुफिया जगह पर इनकी मीटिंग होती है। सभी बिना वर्दी और सरकारी गाड़ी के उस जगह पहुंचते हैं। इसी मीटिंग में ऑपरेशन को अमली जामा पहनाया जाता है।

इसके बाद NSA चीफ अजित डोभाल ने मिशन से पहले आखिरी बार मीटिंग की। इस मीटिंग में सेना के तीनों चीफ और खुफिया एजेंसियों के हेड शामिल थे। मीटिंग में तय हुआ कि मिशन के तहत LoC के उस पार 8 आतंकी कैंपों पर हमला किया जाएगा। मिशन की पूरी तैयार हो चुकी थी, इधर सेना प्रमुख, खफिया एजेंसी के साथ NSA तैयार थे, उधर कमांडोज अपने मिशन की तैयारी कर चुके थे।

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