एक अमेरिकी ने पहचानी बिहार की क्षमता, बदल दी लोगों की जिंदगी

एक अमेरिकी ने पहचानी बिहार की क्षमता, बदल दी लोगों की जिंदगी

By: Sachin
April 04, 21:04
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New Delhi: अमेरिका से जब एक पढ़ा-लिखा नौजवान 2010 में बिहार आया, तो वह दंग रह गया. मन ही मन वो सवालों की उधेड़-बुन में था कि जब यहां के लोगों मे इतना पोटेंशियल है तो फिर वे गरीब और पिछड़े क्यों हैं?

उसे, उसके सवालों का जवाब मिला हो या न मिला हो, लेकिन उसने सुनिश्चित कर लिया कि पढ़ाई पूरी करने के बाद वह बिहार आएगा और यहाँ के लोगों के लिए अपने प्रोजेक्ट पर काम कर उनकी जरूरतों को पूरा करेगा। और अब वो अमेरिकी युवक पिछले चार साल से बिहार में अपने सहयोगियों के लगातार साथ काम कर रहा है।

बता दें कि जुबिन शर्मा नाम का यह युवक अमेरिका के रहने वाले हैं। उनके पिता भारतीय मूल के हैं और मां अमेरिकी हैं। दरअसल, जुबिन पेन्सेलवेनिया यूनिवर्सिटी में पोलिटिकल इकोनॉमी में ग्रेजुएशन कर रहे थे तब (2010) इंटर्नशिप के लिए बिहार के पश्चिम चम्पारण आए थे।

पश्चिम चम्पारण में ज्ञानेश पांडेय, रत्नेश यादव ने चावल की भूसी से बिजली बनाने का कारखाना लगाया था जिसका नाम था हस्क पावर सिस्टम। ज्ञानेश ने IIT से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में B.Tech किया था फिर वे अमेरिका चले गये थे।

जुबिन ने ज्ञानेश से ही हस्क पावर सिस्टम के बारे में सुना था। जुबिन अमेरिका की सुख-सुविधाएं छोड़कर बेतिया के गांव में आ पहुंचे। मिट्टी के घर में रह अपनी इंटर्नशिप पूरी की। इसी समय उन्होंने गांव के लोगों की क्षमता के बारे में पता चला।

जुबिन शर्मा पढाई पूरी करने के बाद 2013 में फिर बिहार आये। इस बार वे किशनगंज पहुंचे। वहां उन्होंने 'सीखो' नाम की एक संस्था की शुरुआत की। उन्होंने 'सीखो' के माध्यम से कई कार्यक्रम शुरू किए। जैसे आंगनबाड़ी सपोर्ट प्रोग्राम, मदर लिट्रेसी प्रोग्राम, रीडिंग प्रोग्राम लागू किया गया। 

आपको जानकार हैरानी होगी कि जुबिन के इस प्रयास से लगभग 4000 हजार लोगों को फायदा मिला। फिर कचरे की समस्या और स्वास्थ्य समस्या के हल के लिए काम शुरू हुआ। गांव के लोगों पर इसका असर पड़ा। वे इस बात से हैरान थे कि अमेरिका का एक नौजवान बिहार के सुदूर गांव में कैसे लोगों के जीने का अंदाज बदल रहा है और उसके साथ ही हर गतिविधि में सहायता करते हैं।

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