बेबाकी से बोले सेना के अफसर, हमने कश्मीर में आतंक की कमर तोड़ी, जनता से बातचीत के लिए सही समय

बेबाकी से बोले सेना के अफसर, हमने कश्मीर में आतंक की कमर तोड़ी, जनता से बातचीत के लिए सही समय

By: Adill Malik
September 28, 12:09
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Srinagar: कश्मीर में आतंक का सबसे अधिक प्रभाव दक्षिण कश्मीर के नागरिकों पर होता है। वैसे तो इस क्षेत्र को आतंकियों को गढ़ माना जाता रहा है, लेकिन पिछले एक साल में यहां के हालात काफी बदल गए हैं। भारतीय सेना के जवान अब तक केवल दक्षिणी कश्मीर में 73 आतंकियों को मार गिरा चुके हैं, जो पिछले साल के मुकाबले लगभग डबल है। दक्षिणी कश्मीर में सेना की अगुवाई करने वाले विक्टर फोर्स के प्रमुख मेजर जनरल बीएस राजू ने एक इंटरव्यू में कहा है कि हमने आतंकवादियों की कमर तोड़ दी है, अब अगला कदम उठाने की बारी सरकार की है।

मेजर जनरल बीएस राजू के मुताबिक, दक्षिण कश्मीर में अब ऐसा कोई इलाका नहीं है, जहां आतंकवादियों या पृथकतावादियों का प्रभाव हो। ऐसे लोग अब सिर्फ अपने बचाव में लगे हैं। उन्होंने बताया कि सेना का पूरा ध्यान अब इस बात पर है कि आतंकी संगठनों में अब और नई भर्तियां न हों और लोगों को विश्वास दिलाया जाए कि सेना वहां उनकी मदद के लिए है। अधिकारी के अनुसार, सैनिकों ने स्कूलों और कॉलेजों में अलग-अलग कार्यक्रम शुरू कर दिए हैं, जिनके जरिए छात्रों को अच्छे और बुरे की समझ दी जा रही है।

सैन्य अधिकारी के मुताबिक, अब तक हमने जो देखा है उसमें सबसे बड़ी बात यह सामने आई है कि ज्यादातर लोग इस समस्या का हल चाहते हैं। वह रोज की हिंसा के इस दुष्चक्र से निकलना चाहते हैं। सैन्य अफसर अभी भी मान रहे हैं कि इस क्षेत्र में करीब 120 से 150 के बीच हथियारबंद आतंकी बचे हैं, जो अब छुपने की जगह ढूंढ रहे हैं।

इस साल मार्च में अपना कार्यभार संभालने वाले राजू कहते हैं कि इन दिनों आतंकी सेना को सीधे निशाना नहीं बना रहे हैं। वह कभी-कभार मुखबिर बताकर आम नागरिकों को निशाना बन रहे हैं। राजू कहते हैं कि अब हालात उस मुकाम पर पहुंच गए हैं, जहां राजनीतिक पहल की शुरुआत की जा सकती है और यह देखकर अच्छा लग रहा है कि इस दिशा में हमारी सरकार की तरफ से कोशिश शुरू हो गई है। आपको बता दें कि हाल ही में केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कश्मीर में खुले दिल से सबको साथ बैठकर बातचीत करने का न्यौता दिया था।

अलगाववादी नेता मीरवायज उमर फारुक सहित कुछ अन्य ने भी केंद्र व राज्य सरकार की इस पहल का स्वागत किया है। राजू कहते हैं, 'अब यह केंद्र सरकार की राजनीतिक समझ पर निर्भर करता है। आप आतंकवाद से पुलिस के जरिए ही नहीं निपट सकते। उन्होंने कहा कि कश्मीरियों के साथ सीधे बातचीत करनी होगी ताकि उन्हें यह बताया जा सके कि क्या दिया जा सकता है और क्या देना संभव नहीं है। हमें लोगों को बताना होगा कि किसी भी हालत में आजादी मुमकिन नहीं है। संविधान के अंतर्गत सब कुछ संभव है। अगर आप आजादी की जिद लगाए रहेंगे तो राज्य की दुर्दशा लंबे समय तक बनी रहेगी।' 

 सैन्य अफसर के मुताबिक, हमारे और सरकार के लिए सबसे बड़ी मुश्किल ये है कि कश्मीर के युवा और स्कूल जाने वाले बच्चे तक कट्टरपंथ की तरफ झुक रहे हैं। हालत ये है कि 8 साल का एक छोटा सा बच्चा भी पत्थर फेंकने वालों की टोली में शामिल हो जाता है। राजू ने कहा कि ऐसा जरूरी नहीं कि हर बच्चा या युवा कट्टरपंथ की वजह से पत्थरबाजी करते हैं, बल्कि कुछ इसे बहादुरी का काम समझकर शामिल हो जाते हैं। उनके मुताबिक, बच्चों को हम ये एहसास कराना चाहते हैं कि सेना उनकी मदद के लिए है, इसके लिए स्कूलों में पेंटिंग प्रतियोगिता, पढ़ाई-लिखाई का सामान बांटना और बच्चों को घुमाने ले जाना और कभी कभार उन्हें खाने पीने की चीजें दे रहे हैं।

राजू की मानें तो कश्मीर में आजादी का राग अलापने वाले ज्यादातर आतंकियों, पृथकतावादियों और पत्थरबाजों को आज तक आजादी का मतलब भी नहीं पता है, बस वो दूसरों की देखादेखी ये सब कहने लगे हैं। हालांकि उन्होंने माना कि कश्मीर के लोग सेना की मौजूदगी से आजादी चाहते हैं। राजू ने कहा कि सेना इस बात को अच्छी तरह समझती है, लेकिन वहां की जनता को मालूम होन चाहिए कि हम उनकी हिफाजत के लिए वहां आए हैं, आतंकवाद एक बार कश्मीर से साफ हो गया तो सभी सैनिक वापस लौट जाएंगे।

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