पढ़ाई में बचपन से ही हमेशा अव्वल आते थे, एआईईईई में आल इंडिया में 7वां रैंक था सुशांत का

New Delhi : सुशांत सिंह राजपूत मूल रूप से बिहार के रहने वाले थे और कुछ दिन पहले अपने पैतृक घर भी आये थे। वह मूल रूप से पूर्णिया के बड़हरा कोठी के मलडीहा के रहने वाले थे। पिछली बार जब वह अपने गांव आये थे तो उन्होंने एक पारिवारिक कार्यक्रम में भी हिस्सा लिया था।
पटना के रहने वाले सुशांत चार बहनों के बीच अकेले भाई थे। पढ़ने शुरू से ही सुशांत काफी होशियार थे और इंजिनियरिंग के ऑल इंडिया एग्जाम (AIEEE) में उन्होंने 7वीं रैंक हासिल की थी। उन्होंने दिल्ली इंजीनियरिंग कॉलेज से अपनी पढ़ाई की। सुशांत अपनी मां और बहनों से बहुत प्यार करते थे। हालांकि कुछ समय पहले उनकी एक बहन नहीं रहीं। उनकी मां भी 2002 में ही दुनिया को अलविदा कह गईं। उसके बाद से ही सुशांत के पिता पटना में अपने घर पर अकेले रहते थे।

हमेशा मां के लाडले रहे सुशांत मां की याद में काफी दुखी रहते थे। सुशांत सिंह राजूपत के सोशल मीडिया अकाउंट की बात करें तो इंस्टाग्राम पर लास्ट पोस्ट उन्होंने अपनी मां के लिये डाला था, जैसे उन्हें उनकी किसी वजह से याद आ रही हो। 3 जून के इस पोस्ट में सुशांत ने अपने साथ अपनी मां की एक तस्वीर लगाई थी। इसके साथ लिखा था- धुंधला अतीत आंखों के आंसू से गायब हो रहा है। पूरे न हुये सपने, खुशियां और ला रहे हैं। वहीं एक जल्द बीतने वाली जिंदगी दोनों के बीच सौदेबाजी कर रही। #मां

सुशांत के इस पोस्ट पर इंडस्ट्री से उनके काफी दोस्तों ने कॉमेंट किए, जिसमें उनकी कथित गर्लफ्रेंड रिया चक्रवर्ती भी शामिल थीं। पिछले छह महीने से वे ट्विटर पर भी एक्टिव नहीं थे। उन्होंने अपना आखिरी ट्वीट दिसंबर 2019 में किया था जो उनकी जर्नी कान्सेप्ट से रिलेटेड थी। लेकिन ठीक इससे पहले उन्होंने एक ट्वीट किया था – एक छाये की तरह मैं हूँ और मैं नहीं भी हूँ…। दुनिया के सबसे मशहूर विचारकों में से एक रूमी का यह विचार बताता है कि वे अपने आपको औचित्यहीन मान रहे थे। अपना महत्व नहीं टटोल पा रहे थे। उनका यह एक ट्वीट ही उनकी मनोदशा को बता पाने के लिये काफी है। इस दौरान भी वे डिप्रेशन का इलाज करा रहे थे।

इससे पहले जब वे पटना आये थे तो पटना के राजीव नगर में पूजा अर्चना की थी। वे राजीव नगर में आसपास में दोस्तों से भी मिले थे। सुशांत सिंह राजपूत की इस घटना के बारे में बिहार के लोगों को अभी तक यकीन नहीं हो रहा है। दरअसल वो पिछली बार जब बिहार आये थे तो अपने पैतृक गांव के लोगों से काफी घुलमिल गये थे। साथ ही उनके ननिहाल जो कि खगड़िया जिला में है में मुंडन में भी शामिल हुये थे।

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