वो वयक्ति जिसे भारत ने 2 बार पीएम चुना, देश के 14वें प्रधानमंत्री और प्रतिभाशाली अर्थशास्त्री थे

वो वयक्ति जिसे भारत ने 2 बार पीएम चुना, देश के 14वें प्रधानमंत्री और प्रतिभाशाली अर्थशास्त्री थे

By: Adill Malik
September 28, 14:09
0
New Delhi:

मनमोहन सिंह भारत के 14वें प्रधानमंत्री रहे,वो प्रतिभाशाली अर्थशास्त्री,महान विद्वान् व विचारत थे। पं. जवाहरलाल नेहरु के बाद ये दूसरे प्रधानमंत्री थे,जिन्होंने 10 साल तक भारत में शासन किया। ये पहले ऐसे प्रधानमंत्री थे, जो हिंदू नहीं बल्कि सरकार थे। राजनीति में आने से पहले मनमोहन जी सरकारी नौकरी किया करते थे,जहां उन्हें उनके काम के लिए बहुत से सम्मान मिले। कुछ समय बाद उन्होंने नौकरी छोड़ राजनेता बनने की ठान ली। इनके शासनकाल में भारत की आर्थिक स्थिति में क्रांतिकारी परिवर्तन हुए। 

मनमोहन सिंह का जन्म 1932 में पंजाब प्रांत के गाह बेगल गांव में हुआ था जो अब पाकिस्तान में पड़ता है। देश विभाजन के बाद उनका परिवार [अमृतसर]भारत आ गया। जन्मतिथि के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने बीते वर्ष बताया था कि मेरी जन्मतिथि 26 सितम्बर इसलिए मानी जाती है कि स्कूल के रिकार्ड में यही तिथि दर्ज है।

गौरतलब है कि डाक्टर मनमोहन सिंह बतौर पी एम् अपने चार जन्मदिन विदेश यात्रा के दौरान विमान में ही मना चुके हैं। पिछले 8 सालों में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का रिकॉर्ड रहा है, वे अपना जन्मदिन अक्सर प्लेन पर ही मनाते चले आ रहे हैं। अब इस बार देखना होगा कि प्रधानमंत्री अपना जन्मदिन कहाँ मनाते हैं| प्रधानमंत्री अपनी सादगी के लिए भी जाने जाते हैं इसीलिए इनके जन्मदिन पर ज्यादा पार्टी और दिखावे का प्रदर्शन नहीं होता।

डाक्टर मन मोहन सिंह को उनकी सादगी के अलावा उनकी उच्च शिक्षा के लिए भी सम्मानित स्थान प्राप्त है। बचपन से ही उनका पढ़ाई की ओर विशेष रुझान था। श्री सिंह ने पंजाब विश्वविद्यालय से प्रथम श्रेणी में बी.ए (आनर्स) की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद वर्ष 1954 में यहीं से एम.ए (इकोनॉमिक्स) में भी उन्होंने पहला स्थान प्राप्त किया। पी.एच.डी. की डिग्री प्राप्त करने के लिए वह कैंब्रिज विश्वविद्यालय गए जहां उन्हें उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए राइट्स पुरस्कार से सम्मानित किया गया। ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के नेफिल्ड कॉलेज से मनमोहन सिंह ने डी. फिल की परीक्षा उत्तीर्ण की। मनमोहन सिंह पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ में व्याख्याता के पद पर नियुक्त होने के बाद जल्द ही प्रोफेसर के पद पर पहुंच गए। मनमोहन सिंह ने दो वर्ष तक दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में भी अध्यापन कार्य किया। अज इन्हें दुनिया एक कुशल अर्थशास्त्री के रूप में जानती है।

1991 में जब पी वी नरसिंहराव प्रधानमंत्री बने तो उन्होंने मनमोहन सिंह को वित्त मंत्री के पद पर नियुक्त किया। इस दौरान भारत आर्थिक संकट से जूझ रहा था। डॉ मनमोहन सिंह ने देश की अर्थव्यवस्था को एक नयी दिशा दी जिससे देश ने आर्थिक उदारीकरण के युग में प्रवेश किया। सबसे पहले उन्होंने लाइसेंस राज को रद् कर दिया जिसके तहत उद्योगों को कोई भी बदलाव करने से पहले सरकार से स्वीकृति लेनी पड़ती थी। उनके इस कदम से निजी उद्योगों को बहुत लाभ  हुआ जिसके फलस्वरूप सरकारी उद्योगों में विनिवेश और निजीकरण की प्रक्रिया प्रारम्भ हुई। 1998-2004 के दौरान जब भारत में बीजेपी की सरकार थी तब वे राज्यसभा में विपक्ष के नेता थे।

पुनः दूसरी बार उन्हें वर्ष 2009 में कांग्रेस ने प्रधानमंत्री पद के लिए उन्ही पर भरोसा किया। 2009 के लोकसभा चुनावों में मिली जीत के बाद वे जवाहरलाल नेहरू के बाद भारत के पहले ऐसे प्रधानमंत्री बन गए हैं जिनको पांच वर्षों का कार्यकाल सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद लगातार दूसरी बार प्रधानमंत्री बनने का अवसर मिला है। बतौर प्रधानमंत्री उनका दूसरा कार्यकाल 2014 में पूरा हो रहा है। यह सम्मान सबसे शक्तिशाली पी एम् इंदिरा गांधी जी के खाते में भी नहीं है।

 पुरस्कार एवं सम्मान

1982 में सेंट जोंस कॉलेज, केम्ब्रिज, ने मनमोहन सिंह को मानद सदस्यता दी।

पांच साल बाद भारत सरकार ने उन्हें पद्म विभूषण से सम्मानित किया।

1994 में उन्हें डिस्टिंगग्विश्ट फेलो ऑफ़ लन्दन स्कूल ऑफ़ इकोनॉमिक्स से सम्मानित किया गया।

1999 में डॉ मनमोहन सिंह को राष्ट्रीय कृषि विज्ञान संस्था, नई दिल्ली, द्वारा सदस्यता दी गई।

2002 में उन्हें अन्ना साहेब चिरमुले ट्रस्ट की ओर से अन्ना साहेब चिरमुले पुरस्कार से सम्मानित किया गया। दो वर्ष बाद भारतीय संसदीय दल की तरफ से उन्हें सर्वश्रेष्ठ सांसद का पुरस्कार दिया गया।

2010 में उन्हें अपील ऑफ़ कान्शन्स फौन्डेशन की ओर से वर्ल्ड स्टैट्स्मन पुरस्कार प्रदान किया गया।

मनमोहन सिंह काफी शांत स्वभाव के आदमी थे,उन्होंने कभी भी राजनीति और सत्ता् की आड़ में किसी को बुरा भला नहीं कहा। उनके इस शांत स्वभाव के चलते लोग उनका मजार भी बहुत बनाया करते थे। लोग उन्हों सोनिया जी की कठपुतली कहा करते थे। लोगो का मानान था कि वे बुद्धि से काम नहीं करते थे, जैसे सोनिया जी कहती है वैसा ही करते थे। लेकिन मनमोहन जी का इन सब बातों से कभी फर्क नहीं पड़ता था। मनमोहन सिंह ने अर्थ शास्त्र पर अपने अनुभव के अनुसार बहुत सारे किताबें भी लिखी है। 

हर ताज़ा अपडेट पाने के लिए के फ़ेसबुक पेज को लाइक करें।