मिसाल- गुरुकुल में पढ़े बालकृष्ण आज हैं अरबों के मालिक, नहीं गये कॉलेज पर मैनेजमेंट के माहिर

New Delhi : पतंजलि आज जो कुछ भी है उसके पीछे बड़ा योगदान आचार्य बालकृष्ण का है। लोग जिन्हें घास-फूस समझते थे इस व्यक्ति ने जंगलों में घूम-घूम कर नई नई औषधियां खोज निकाली। उनकी अपने काम पर इसी लगन नतीजा है कि आज वो दुनिया की बड़ी कंपनियों में शुमार पतंजलि के सीईओ और लगभग 1.3 अरब डॉलर की संपत्ति के मालिक हैं। आज भारत ही नहीं दुनिया भर में उन्हें औषधी विशेषज्ञ के रूप में जाना जाता है। बीते साल उनके इस योगदान को देखते हुए यूएनओ की संस्था यूएनएसडीजी (यूनाइटेड नेशन सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल) की तरफ से स्वास्थ्य क्षेत्र में उन्हें सम्मानित किया गया।

बालकृष्ण का जन्म 4 अगस्त 1972 को हरिद्वार में हुआ था। ये मूलरूप से नेपाली है। बालकृष्ण ने संस्कृत विषय में आर्युवेद और जड़ी-बूटियों में महारथ हासिल की हैं. बालकृष्ण अभी वर्तमान में पतंजलि के सीईओ हैं और पतंजलि का प्रचार-प्रसार भी करते हैं। आचार्य बालकृष्ण के जन्म दिवस पर पतंजलि योगपीठ हर साल जड़ी-बूटी दिवस के रूप में मनाता हैं।
बालकृष्ण ने बचपन से आर्युवेद केंद्र के माध्यम से पारम्परिक आयुर्वेद पद्दति को आगे बढ़ाने का कार्य किया हैं। बालकृष्ण एक लेखक भी हैं। बालकृष्ण ने आर्युवेद पर कई पुस्तकें भी लिखी हैं। रामदेव और बालकृष्ण दोनों ने मिलकर हरिद्वार में एक आचार्यकुलम की स्थापना की हैं। रामदेव और बालकृष्ण दोनों मोदी के स्वच्छ भारत के कार्यक्रम से भी जुड़े हैं। बाबा रामदेव के साथ मिलकर बालकृष्ण ने 1990 में हरिद्वार में दिव्य फार्मेसी की शुरुआत की थी, जो बाद पतंजलि बना। योग और आयुर्वेद के क्षेत्र में योगदान के लिए बालकृष्ण को श्री विरांजन्या फाउंडेशन सुजान श्री अवार्ड से भी सम्मानित किया गया है। बालकृष्ण योग संदेश मैगजीन के एडिटर इन चीफ हैं। उन्होंने योग और आयुर्वेद पर 41 रिसर्च पेपर किए हैं।
सन 2006 में पतंजलि आयुर्वेद की स्थापना हुई। वर्तमान में पतंजलि आयुर्वेद आयुर्वेदिक औषधियों और विभिन्न खाद्य पदार्थों का उत्पादन करती है। भारत के साथ-साथ विदेशों में भी इसकी इकाइयां बनाने की योजना है, इस संदर्भ में नेपाल में कार्य प्रारम्भ हो चुका है।पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड पूरी तरह से स्वदेशी (भारतीय) कंपनी है। आज इस कंपनी को ख़़ड़ा करने के लिए बालकृष्ण के योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता।

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