न्यूयॉर्क टाइम्स का दावा, अफगानिस्तान की बर्बादी के पीछे ISI का हाथ

न्यूयॉर्क टाइम्स का दावा, अफगानिस्तान की बर्बादी के पीछे ISI का हाथ

By: Aryan Paul
August 10, 13:08
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New Delhi: New York Times के दावे में प्रकाशित एक लेख में बड़ा खुलासा, ISI ने अफगानिस्तान में स्कूल, पुलों और सड़कों को तबाह करने के लिए तालिबान नेता मुल्ला मंसूर को आदेश दिया था ।

अफ़ग़ानिस्तान की ख़ुफ़िया एजेंसी राष्ट्रीय सुरक्षा निदेशालय के मुताबिक मुल्ला मंसूर पिछले साल 21 मई को बलूचिस्तान में अमेरिकी ड्रोन हमले में मारा गया था । अफगानिस्तान में मारे गए मुल्ला मंसूर ने पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI के आदेशों को मानने से मना कर दिया था, ISI चाहती थी कि मुल्ला मंसूर अफगानिस्तान को तबाह करने में उनकी मदद करें । मंसूर पाकिस्तान की तरफ से सिराजुद्दीन हक्कानी को प्रमोशन दिए जाने का विरोध किया था । कार्लोटा गैल और रुहुल्लाह खापलवक द्वारा लिखित एक न्यूयॉर्क टाइम्स के लेख में कहा गया है- कि मंसूर ने पाकिस्तान की मांगों को अपने एजेंडे में शामिल करने से मना कर दिया था ।

न्यूयॉर्क टाइम्स में छपे लेख में एक तालिबानी कमांडर के इंटरव्यू के अनुसार- जो मुल्ला मांसूर के काफी करीब था, मुल्ला मंसूर के जीवन के बारे में उसने काफी चौकाने वाली जानकारियां दी, मुल्ला मंसूर कब, कैसे और क्यों मारा गया ? मौत के पीछे के सभी कारणों का खुलासा तालिबानी कमांडर ने किया । ये इंटरव्यू अफगान के पुलिस अधिकारियों ने लिया था, जो मुल्ला मंसूर की मौत को लेकर तहकीकात कर रहे थे । लेख के अनुसार मुल्ला मंसूर को अमेरिका के हमले से पहले पाकिस्तान के द्वारा उसे मारा जाने का ज्यादा डर था, जब मुल्ला मंसूर को अपनी मौत का एहसास हो गया था, तो उसके कुछ घंटों पहले ही उसने अपने भाई, और रिश्तेदारों का बुलाया था ।

New York Times में छपे लेख के अनुसार अफगान में दोनों तरफ से छिड़े युद्ध और पश्चिमी सुरक्षा विश्लेषकों की बढ़ती संख्या का हवाला देते हुए कहा गया है कि पाकिस्तान को तालिबान नेता को मारना जरूरी हो गया था । लेख में पूर्व तालिबान के कमांडर के हवाले से कहा गया कि- मुल्ला मंसूर पाकिस्तान को कह रहा था कि वे उसे सारी मांगे मानने के लिए मजबूर नहीं कर सकते, क्योंकि वह विद्रोह की लड़ाई लड़ रहा हूं और अपनों की मौत का बदला ले रहा है ।

मुल्ला मंसूर की मौत के बाद मावलाई हाइबत्तुल्ला अकुंदजादा जो तालिबान के नेता के रूप में चुन लिया गया, हालांकि ये बात अलग है कि उसे बिल्कुल भी आर्मी ऑपेरशन की जानकारी नहीं थी, उसे आर्मी के साथ लड़ाई का कोई अनुभव नहीं था । तालिबान के 90 प्रतिशत लोगों ने पाकिस्तानियों को दोषी ठहराया और पूर्व तालिबान के कमांडर ने कहा- लेकिन वे फिर भी पाकिस्तान के खिलाफ कुछ नहीं कर सकते, वे काफी ज्यादा डरे हुए हैं ।

लेख के अनुसार- तालिबान के मुख्य वित्तपोषण के लिए मंसूर पाकिस्तान की खुफिया सेवा और अरब-गल्फ राज्यों और अफगानिस्तान के डॉक्टरों पर भरोसा करते थे । लेकिन वह ईरान और यहां तक कि रूस से हथियारों और अन्य समर्थन की भी मांग करते थे।

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