चे ग्वेरा: उस क्रांतिकारी का नाम है जो डॉक्टर बनते-बनते मार्क्सवादी क्रांति का जनक बन बैठा

चे ग्वेरा: उस क्रांतिकारी का नाम है जो डॉक्टर बनते-बनते मार्क्सवादी क्रांति का जनक बन बैठा

By: Aryan Paul
October 08, 18:10
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New Delhi:

अर्नेस्तो चे ग्वेरा के जीवन में वैसे तो सब कुछ सही चल रहा था, क्योंकि वे डॉक्टरी की पढ़ाई कर रहे थे। फिर भी ना जाने कौन सी बेचैनी थी जिसके कारण अपने एक दोस्त के साथ उन्होंने पूरे लैटिन अमेरिका की यात्रा करने की ठानी। इस यात्रा के दौरान अर्नेस्तो गेवारा की आंखों ने जो देखा वो दिल पर गहरा प्रहार करने लगा। उन्हें पता चल चुका था कि लैटिन अमेरिका के हालात सिर्फ़ और सिर्फ़ गरीबी के कारण बिगड़े हैं। साम्राज्यवाद और पूंजीवाद ने जिस तरह से पूरे महाद्वीप को जकड़ रखा है उससे बचने का एक ही तरीका है क्रांति, विश्व क्रांति ।

उस क्रांति के बीज बोए थे चे ग्वेरा ने। जिनका पूरा नाम था अर्नेस्तो चे ग्वेरा। जो बाद में मार्क्सवादी क्रांति के जनक बने। उनका जन्म अर्जेंटिना के रोज़ारियों में 14 जून 1929 को हुआ था। चे सबसे पहले एक क्रांतिकारी थी, फिर पेशे से एक डॉक्टर, गुरिल्ला नेता, लेखक और कूटनीतिज्ञ थे। दक्षिण अमेरिका के साथ सदियों से अत्याचार होता आया है। वहां संसाधनों की भरमार है, इसी के चले अमेरिका अपनी नकेल कसे रखता है। जब चे की रगों का खूं उबाल खा रहा था। तब चे ने पूरा दक्षिण अमेरिका घूमा और वहां की दिक्कतों ने एक डॉक्टर बनने वाले अर्नेस्तो ग्वेरा को चे ग्वेरा बना दिया। 

इसके बाद गुआटेमाला के राष्ट्रपति याकोबो आरबेंज़ गुज़मान द्वारा चलाये जा रहे सामाजिक सुधार आंदोलनों में चे ने भाग लेना शुरू किया। इसके बाद उनकी मुलाकात फिदेल कास्त्रो और राउल कास्त्रो से हुई। चे की उम्र उस समय 27 साल की थी। क्यूबा में फिदेल कास्त्रो ने चे को हाथों-हाथ लिया और उनके विचारों से रूबरू होने के बाद चे को कई अहम भूमिकाएं दी। ये सब इतना आसान नहीं था अमेरिकी शक्तियां लगातार अपने खिलाफ़़ उठती आवाज़ों को दबा रही थी। ऐसे में इन आंदोलनों को चलाना और विरोध का डंका बजाना बहुत मुश्किल काम था ।

आपको बता दें कि जिस तरह से हमारे यहां भाई, ब्रो, ड्यूड बोला जाता है वैसे ही क्यूबा में चे बोला जाता है। फिदेल कास्त्रो के साथ जब ग्वेरा की मुलाकात हुई तो जल्द ही क्रांतिकारियों का समूह ग्वेरा को चे के नाम से पुकारने लगा। अपने आसपास जिस तरह से चे ने यात्राओं का सहारा लेते हुए दर्द देखा था, वो दर्द ताउम्र उनमें ज़िंदा रहा। मार्क्सवाद की ओर झुकाव हो गया और तर्क के साथ-साथ सशस्त्र आंदोलन उन समस्याओं के निदान का एक तरीका बन गया। 31 वर्ष की उम्र में चे को फिदेल ने राष्ट्रीय बैंक का अध्यक्ष और देश का उद्योग मंत्री बना दिया, लेकिन वो राजधानी में बैठकर काम नहीं करना चाहते थे बल्कि ज़मीनी स्तर पर जाकर पूंजीवाद और साम्राज्यवाद के खिलाफ़ आंदोलन को और मजबूत करना चाहते थे। इनकी सबसे प्रसिद्ध कृतियां हैं, गुरिल्ला युद्ध की नियम-पुस्तक और दक्षिणी अमरीका में इनकी यात्राओं पर आधारित मोटरसाइकल डायरियां ।

समाजवाद के लिए चे ने पूरा विश्व घूम कर समर्थन जुटाना शुरू किया। उनकी एक किताब है, चे को लिखने का बहुत शौक था। वो डायरी लिखा करते थे। डायरी का नाम है बोलीविया डायरी। उसमें चे की यात्रा और आंदोलन के दौरान आंखों-देखी का हाल लिखा है। 1964 में चे ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में भाषण दिया। कई देशों के वरिष्ठ मंत्री इनका भाषण सुनने के लिए आये। चे ने क्यूबा की ओर से इस भाषण में भाग लिया था। कांगों में चे ने लोगों को क्रांतिकारी बनाने के लिए गुरिल्ला पद्धित सिखाई थी। इसके बाद बोलीविया में उठते विद्रोह को आग बनाने का काम भी चे ने ही किया। वो एक ऐसे क्रांतिकारी थे, जो अपने अंदर की आग को अपने तक सीमित नहीं रखते थे, बल्कि तमाम व्यवस्थाओं को जला कर खाक रखने का दम रखते थ।. अमेरिका की खुफिया एजेंसी चे को ढूंढ़ रही थी और चे लोगों को उनके हकों के लिए जगा रहे थे। आखिरकार बोलीविया सेना की मदद से 9 अक्तूबर 1967 को अमेरिका खुफिया एजेंसी ने चे को पकड़ लिया और मार दिया। आज चे मरा नहीं है, चे पालिका के बाज़ारों से लेकर अमेरिका की गलियों में, क्यूबा के पोस्टरों में हर जगह देखा जा सकता है।

क्यूबा के कम्युनिस्ट क्रांतिकारी नेता चे ग्वेरा की बेटी को डर है कि ट्रंप के पागलपन से मानवता नष्ट हो सकती है। ग्वेरा की सबसे बड़ी बेटी हैं डॉ. अलीदा ग्वेरा। जिन्होंने अमेरिका पर लोगों की ताकत को कुचलने के लिए युद्ध का इस्तेमाल करने का भी आरोप लगाया। ग्वेरा परिवार के लिए अक्सर प्रवक्ता के रुप में नजर आने वाली 57 वर्षीय अलीदा ने क्यूबा की राजधानी हवाना में एक साक्षात्कार में वीक से कहा- इन व्यक्ति के पास मानवता को नष्ट करने की बहुत ताकत है और हम उस मानवता का हिस्सा हैं। 

अलीदा ने कहा कि यह जाग जाने का वक्त है। उन्हें जागना होगा क्योंकि उनके पास ज्यादा वक्त नहीं बचा है। अपने चुनाव अभियान के दौरान ट्रंप ने क्यूबा से फिर से संबंध स्थापित करने के लिए 2014 में तत्कालीन राष्ट्रपति बराक ओबामा द्वारा किये गये करार की आलोचना की थी और इससे पीछे हटने का निश्चय किया था। जून में ट्रंप ने क्यूबा पर नये यात्रा एवं कारोबार प्रतिबंधों की घोषणा की थी। अलीदा ने कहा कि प्रतिबंध से मेडिकल व्यवस्था और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र पर असर पड़ा है।

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