दोगला : इधर सेना से फिर बातचीत पर हामी, उधर चीनी मीडिया ने फिर जारी किया युद्धाभ्यास का वीडियो

New Delhi : पूर्वी लद्दाख में बीते एक महीने से चल रहे तनाव के बीच भारतीय सेना चीन के साथ आने वाले समय में फिर से बातचीत करने जा रही है। यह बैठक चुशूल में अगले कुछ दिनों के अंदर हो सकती है। इसके लिए सेना ने पूरी तैयारी कर ली है। सूत्रों ने न्यूज एजेंसी एएनआई को बताया- चुशूल में सैन्य दल के सदस्य चीन के साथ बातचीत करने को तैयार हैं। सरकारी अधिकारियों और सेना के मुख्यालय से सैन्य टीम को बैठक को लेकर दिशा-निर्देश भी जारी कर दिये गये हैं। दूसरी तरफ बातचीत की हामी भर रहा चीन सेना के युद्धाभ्यास की प्रक्रिया को तेज कर रहा है और युद्धाभ्यास के वीडियो भी जारी कर रहा है।

 

चीनी मीडिया रोजाना चीन की सेना के युद्धाभ्यास के वीडियो को जारी कर तनाव भड़काने में जुटी है। चीन आधिकारिक तौर पर तो शांति की बात करता है तो अपनी सरकारी मीडिया के जरिए सैन्य युद्धाभ्यास की तस्वीरें और वीडियो जारी कर दबाव की रणनीति पर भी कायम दिखता है। इसी दोहरे रवैये ने चीन के लिए दुनियाभर में विश्वसनीयता का संकट खड़ा कर दिया है, लेकिन उसकी नजर ही नहीं खुल रही।
मंगलवार को भी चीन सरकार के मुखपत्र ग्लोबल टाइम्स ने भारत से लगी सीमा के नजदीक युद्धाभ्यास का वीडियो जारी किया। जिसमें कहा गया है कि यह युद्धाभ्यास मई के मध्य से जून के शुरुआती हफ्ते तक चला। इस दौरान चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के पैराट्रूपर्स ने टैक्टिकल ड्रिल और युद्ध की परिस्थियों में की जाने वाली कार्रवाईयों को अंजाम दिया।
ग्लोबल टाइम्स ने बताया कि पीएलए एयरबोर्न ब्रिगेड ने 1 जून को उत्तरपश्चिमी चीन के सीमावर्ती हिस्से में बड़े पैमाने पर युद्धाभ्यास का आयोजन किया। इसमें चीनी एयरफोर्स के पैराट्रूपर्स के अलावा मैकेनाइज्ड इन्फैंट्री बटालियन ने हिस्सा लिया। इस दौरान जिसमें ऑर्मर्ड व्हीकल, टैंक-तोप और मिसाइल ब्रिगेड, सेना की इंजीनियरिंग टुकड़ी ने एक वास्तविक युद्धक परिदृश्य में अपनी तैयारियों को जांचा।

 

एक तरफ इस तरह का वीडियो जारी हो रहा है तो दूसरी तरफ चीन बातचीत के लिये भी तैयार है। हाल ही में छह जून को भारत और चीन के बीच कमांडर स्तर की बातचीत हो चुकी है। इस बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व 14 कॉर्प्स कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल हरिंदर सिंह ने किया था तो वहीं, चीन का प्रतिनिधित्व कमांडर मेजर जनरल लियू लिन ने किया था। दोनों ही देशों की सरकारों ने बैठक के बाद सकारात्मक रुख जरूर अपनाया था, लेकिन जमीनी स्तर पर त्वरित परिणाम नहीं निकल सका है। ऐसे में दोनों देश सीमा विवाद को लेकर कूटनीतिक और सैन्य स्तर की बातचीत को जारी रख सकते हैं।

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