रोहिंग्या महिलाओं ने बताया- लड़कियों को उठा ले जाते हैं जवान, कत्ल कर सड़कों पर फेंक देते हैं

रोहिंग्या महिलाओं ने बताया- लड़कियों को उठा ले जाते हैं जवान, कत्ल कर सड़कों पर फेंक देते हैं

By: Aryan Paul
September 14, 15:09
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New Delhi:

बांग्लादेश के रिफ्यूजी कैंपों में रह रहे रोहिंग्याओं की आपबीती इंसानियत को झकझोर देने के लिए काफी है। जिस तरह से रोहिंग्या को म्यांमार से बेदखल किया जा रहा है। वो रौंगटे खड़े कर देने वाला है। आज आपको बताते हैं रोहिंग्या महिलाओं की आप बीती। बेगम बहार और हामिदा खातून समते कई महिलाओं का दर्द जानकर आप भी सोचने पर मजबूर हो जाएंगे 

जानिए बेगम बहार का दर्द.....

बेगम बहार ने बताया कि लगातार तीन दिनों तक नंगे पैर जंगलों में अपनी 8 महीने की बच्ची के साथ भटकती रहीं, और अपनी बच्ची को पीठ पर कपड़े से बांधकर जंगलों में नंगे पैर चलती रहीं। जब उन्हें भूख लगती तो वह पत्ते खातीं, और जमीन से उठाकर छोटे-छोटे कीड़ों को खाकर अपना पेट भरती, कहती हैं कि जब उन्हें प्यास लगती तो मजबूरन खारा पानी पीना पड़ता । इसी तरह पार करते-करते वे बेगम बहार जब नाफ नदी के पास पहुंची, तो नाव देखते ही वह जमीन पर गिरकर जोर-जोर से रोने लगीं। जब नाव पर सवार होकर कुछ दूर तक गईं तब अहसास हुआ कि पैर खून से लथपथ थे । 

हामिदा खातून किस तरह पहुंची बांग्लादेश....

हामिदा खातून जो कॉक्स बाजार के कुतुपलंग कैंप में रह रहीं हैं, बीते दिनों को याद कर बोलीं- वे हर रात मौत से जूझते थे। खातून अपना दर्द सुनाते हुए कहती हैं कि रात में आर्मी के लोग हमारे घरों में जबरदस्ती घुस जाते थे, और घरों से लड़कियों को उठाकर जंगल में ले जाते थे, और उनका रेप करते थे। किसी-किसी को वापस सड़क पर अधमरी हालत में छोड़ देते थे तो बाकियों का गला रेतकर मौत के घाट उतार देते थे । खातून ने कहा कि वे खुश हैं कि कम से कम यहां शांति से सो तो सकती हैं ।

संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों के अनुसार, करीबन 4 लाख रोहिंग्या मुस्लिमों ने 2 हफ्ते में भागकर बांग्लादेश में शरण ली है। पिछले साल से कैंप में रह रहे हाफिज खैरुल आमीन ने बताया  कि उन्होंने अपने दोस्तों को सैनिकों की गोलियों का शिकार होते देखा है। वे किसी तरह एक ड्रम में छिपकर अपनी जान बचाकर वहां से भागे ।

बता दें कि म्यामांर में रोहिंग्या कई दशकों से ऐसे ही बिना नागरिकता के रह रहे हैं। म्यांमार में रोहिंग्या मुस्लिमों की जनसंख्या 13 लाख बताई जाती है, 2013 में संयुक्त राष्ट्र ने रोहिंग्या मुस्लिमों को दुनिया का सबसे सताया हुआ अल्पसंख्यक समुदाय घोषित किया था। म्यांमार की सेना ने हाल ही में रोहिंग्या मुस्लिमों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की है जिसकी वजह से लाखों रोहिंग्या भागकर बांग्लादेश के शरणार्थी कैंपों और भारत में शरण ले चुके हैं। 

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