सूर्य की किरणों से सुनहरा हो जाता है भगवान शिव का ये पर्वत, दर्शन करने वालों को दिखता है 'ॐ'

सूर्य की किरणों से सुनहरा हो जाता है भगवान शिव का ये पर्वत, दर्शन करने वालों को दिखता है 'ॐ'

By: Sachin
January 11, 21:01
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New Delhi: मानसरोवर के कारण कुमाऊं की धरती पुराणों में उत्तराखंड के नाम से जानी जाती है। यहां का नाम सुनते ही मन में श्रद्धा और भक्ति की भावना जागृत हो जाती है।

मानसरोवर के कारण कुमाऊं की धरती पुराणों में उत्तराखंड के नाम से जानी जाती है।

यहां जाना कठिन होता है लेकिन भगवान शिव के दर्शन करने हर साल हजारों श्रद्धालु इन कठिन रास्तों की परवाह किए बिना कैलाश मानसरोवर की यात्रा पर जाते हैं।

यहां का नाम सुनते ही मन में श्रद्धा और भक्ति की भावना जागृत हो जाती है।

यहां की सबसे खास बात तो ये है की सूर्य की पहली किरणें जब कैलाश पर्वत पर पड़ती हैं तो यह पूर्ण रूप से सुनहरा हो जाता है। इतना ही नहीं, कैलाश मानसरोवर यात्रा के दौरान आपको पर्वत पर बर्फ़ से बने साक्षात 'ॐ' के दर्शन हो जाते हैं। कैलाश मानसरोवर की यात्रा में हर कदम बढ़ाने पर दिव्यता का एहसास होता है। ऐसा लगता है मानो एक अलग ही दुनिया में आ गए हों।

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यहां की सबसे खास बात तो ये है की सूर्य की पहली किरणें जब कैलाश पर्वत पर पड़ती हैं तो यह पूर्ण रूप से सुनहरा हो जाता है।

रहस्यमय बर्फानी ॐ का चिह्न:-

इसे ॐ पर्वत  इसलिए कहा जाता है क्योंकि पर्वत का आकार व इस पर जो बर्फ़ जमी हुई है वह ओउम आकार की छटा बिखेरती है तथा ओउम का प्रतिबिंब दिखाई देता है। पर्वत पर ॐ अक्षर प्राकृतिक रूप से उभरा है। ज्यादा हिमपात होने पर प्राकृतिक रूप से उभरा यह ॐ अक्षर चमकता हुआ स्पष्ट दिखाई देता है।

इतना ही नहीं, कैलाश मानसरोवर यात्रा के दौरान आपको पर्वत पर बर्फ़ से बने साक्षात 'ॐ' के दर्शन हो जाते हैं।

ॐ पर्वत कैलाश मानसरोवर यात्रा मार्ग पर भारत-तिब्बत सीमा -लिपुलेख पास से 9 कि.मी पहले नवींढांग (नाभीढांग) नामक स्थान पर है। अप्रैल 2004 से छोटा कैलास की यात्रा शुरू हुई। तभी से इस पर्वत का महत्व भी बढ़ गया।

कैलाश मानसरोवर की यात्रा में हर कदम बढ़ाने पर दिव्यता का एहसास होता है।
 

मानसरोवर का महत्व:-

ये भी कहा जाता है कि ब्रह्मा ने अपने मन-मस्तिष्क से मानसरोवर बनाया है। दरअसल मानसरोवर संस्कृत के मानस (मस्तिष्क) और सरोवर (झील) शब्द से बना है। मान्यता है कि ब्रह्ममुहुर्त (प्रात:काल 3-5 बजे) में देवतागण यहां स्नान करते हैं। ग्रंथों के अनुसार, सती का हाथ इसी स्थान पर गिरा था, जिससे यह झील तैयार हुई।

 ब्रह्मा ने अपने मन-मस्तिष्क से मानसरोवर बनाया है।

इसे 51 शक्तिपीठों में से भी एक माना गया है। गर्मी के दिनों में जब मानसरोवर की बर्फ़ पिघलती है, तो एक प्रकार की आवाज़ भी सुनाई देती है। श्रद्धालु मानते हैं कि यह मृदंग की आवाज़ है। एक किंवदंती यह भी है कि नीलकमल केवल मानसरोवर में ही खिलता और दिखता है।

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