इस खास वजह से जन्माष्टमी पर लगाया जाता है बालगोपाल को माखन मिश्री का भोग

इस खास वजह से जन्माष्टमी पर लगाया जाता है बालगोपाल को माखन मिश्री का भोग

By: Sachin
August 12, 21:08
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New Delhi: भगवान कृष्ण के जन्म दिवस को हिंदू धर्म में जन्माष्टमी के पर्व के तौर पर मनाया जाता है। भगवान श्रीकृष्ण के भक्त इस बार जन्माष्टमी का उत्सव 14-15 अगस्त को मनाएंगे। 

हिन्दू कैलेंकर के अनुसार ऐसा कहा जाता है कि श्रीकृष्ण का जन्म श्रावण मास के आठवें दिन यानि अष्टमी पर मध्यरात्रि में हुआ था। भारतीय धर्म शास्त्रों में कहा गया है जब-जब धरती पर पाप बढ़ता है तब भगवान किसी न किसी रूप में अवतार लेते हैं। इसी तरह द्वापर युग में भगवान विष्णु ने श्रीकृष्ण के रूप में जन्म लिया। श्रीकृष्ण को भगवान विष्णु का आठवां अवतार माना गया है जिन्होंने देवकी और वासुदेव के पुत्र के रूप में जन्म लिया और मथुरावासियों को निर्दयी राजा कंस के शासन से मुक्ति दिलाई।

भले ही श्रीकृष्ण के माता-पिता देवकी और वासुदेव थे लेकिन बचपन से ही उनका पालन-पोषण यशोदा और नंद ने किया था। ऐसी भविष्यवाणी की गई थी कि देवकी और वासुदेव का आठवां पुत्र कंस की मृत्यु का कारण बनेगा। इस भविष्यवाणी को सच होने से रोकने के लिए राजा कंस ने अपनी बहन देवकी और वासुदेव को बंदी बना लिया और कई सालों के लिए उन्हें कारागार में डाल दिया था। इतना ही नही इस दौरान देवकी ने जिन छ संतानों को जन्म दिया कंस ने उनका भी वध कर दिया। लेकिन श्रीकृष्ण के जन्म के समय वासुदेव बालकृष्ण को भगवान के निर्देशानुसार वृंदावन यशोदा और नंद को सौंप आए, जहां कृष्ण ने अपना बचपन बिताया और कुछ सालों बाद उन्होंने कंस का वध कर भविष्यवाणी को सही साबित किया।

वृंदावन में श्रीकृष्ण एक नटखट बालक थे, जिसे गांव में उनकी शरारतों के लिए जाना जाता था। श्रीकृष्ण को बचपन से ही मक्खन बेहद पंसद था। कहा जाता है कि मैया यशोदा हर रोज खुद अपने हाथों से माखन मिश्री बनाकर श्रीकृष्ण खिलाती थीं लेकिन श्रीकृष्ण को माखन इतना पंसद था कि वह पूरे गांव में मथा हुआ माखन चुराकर खाते थे। श्रीकृष्ण को माखन चुराने से रोकने के लिए एक बार उनकी मां ने उन्हें एक खंभे से बांध दिया था।

श्रीकृष्ण की इस हरकत के चलते उनका नाम माखन चोर पड़ा और जन्माष्टमी के पावन अवसर पर उनके भक्त मुख्य भोग के तौर पर उन्हें माखन मिश्री का भोग लगाते हैं। इसके अलावा भगवान के लिए छप्पन भोग भी बनाया जाता है जिसमें 56 तरह की खाने की कई चीजें शामिल होती हैं। भगवान को भोग लगने के बाद इन सभी चीज़ों को भक्तों में बांटा जाता है और इस प्रसाद को ग्रहण करने बाद वे अपना व्रत तोड़ते हैं।

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