एकादश रुद्र का दुर्लभ मंदिर, दर्शन मात्र से सारे मनोकामना होती है पूरी

एकादश रुद्र का दुर्लभ मंदिर, दर्शन मात्र से सारे मनोकामना होती है पूरी

By: Rajender Singh Gusain
January 11, 20:01
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PATNA : मधुबनी के मंगरौनी में स्थित है बाबा एकादश रुद्र का दुर्लभ मंदिर देश के हिन्दू तीर्थ स्थलों में मधुबनी जिला मुख्यालय के निकट मंगरौनी गांव स्थित एकादश रुद्र महादेव का अलग ही महत्व है।

ये महत्व इसलिये भी बढ़ जाता है कि यह अपने आप में दुनिया में अनोखी जगह है, जहां एक साथ शिव के विभिन्न रूपों 11 शिवलिंगों का दर्शन व पूजन का अवसर मिलता है। यहां शिव 11 रूपों महादेव, शिव, रुद्र, शंकर, नील लोहित, ईशान, विजय, भीम देवदेवा, भदोद्भव एवं कपालिश्च के दर्शन का सौभाग्य शिव भक्तों को विशेष तौर पर मिलता है।

इसके अलावा इस एकादश रुद्र मंदिर परिसर में विष्णु के विभिन्न अवतारों, श्री विद्या यंत्र, विष्णुपद गया क्षेत्र, महाकाल, महाकाली, गणेश सरस्वती आदि का भी पूजन व दर्शन का अवसर यहां आने वाले श्रद्धालु भक्तों को प्राप्त होता है। साथ ही आम एवं महुआ का आलिंगन-बद्ध वृक्ष, भगवान शिव, पार्वती, महा-लक्ष्मी, महा-सरस्वती यंत्र, विष्णु-पादुका आदि के भी दर्शन का सौभाग्य प्राप्त होता है। इस परिसर स्थित पीपल वृक्ष का भी तांत्रिक महत्तम अलग ही है। कहते हैं कि इसके स्पर्श मात्र से भूत प्रेत के प्रभाव से लोगों को मुक्ति मिल जाती है। वहीं श्री विद्या यंत्र के दर्शन व पूजन से लक्ष्मी एवं सरस्वती दोनों की कृपा बनी रहती है।

वैसे तो यहां सभी दिनों में शिव भक्तों द्वारा यहां पूजा अर्चना की जाती है लेकिन सोमवार के दिन यहां पूजन का विशेष महत्व है। इस दिन भंडारे का भी आयोजन किया जाता है, जहां भारी संख्या में श्रद्धालु भक्त प्रसाद ग्रहण करते हैं। सोमवार के दिन यहां शिव के सभी एकादश रूपों में स्थापित 11 शिवलिंगों का विशेष श्रृंगार किया जाता है। इस दिन यहां रुद्राभिषेक एवं षोडषोपचार पूजन करते हैं तो उनकी इच्छित मनोकामनाएं निश्चित रूप से पूरी होती हैं। सावन माह में तो एकादश रुद्र के पूजन का अलग ही महत्व है। इस माह के सोमवारी के दिन शिव-भक्तों को यहां रुद्राभिषेक एवं षोडषोपचार पूजन का अवसर मिल जाता है।

प्रधान पुजारी पंडित आत्माराम जी ने बताया कि जब कांची पीठ के शंकराचार्य जयेन्द्र सरस्वती, बिहार राज्य धार्मिक न्यास बोर्ड के अध्यक्ष आचार्य किशोर कुणाल व अधीक्षण पुरातत्व-विद डॉ। फणीकांत मिश्र आदि आये तो यहां शिव के एकादश रुद्र का अलौकिक रूप देख भाव विह्वल हो गये। उन्होंने कहा कि ये अपने आप में धार्मिक दृष्टिकोण से अद्वितीय पूजन व तीर्थ स्थल है।

पंडित जी बताते हैं कि यहां एक ही शक्ति-वेदी पर स्थापित शिव के सभी एकादश रुद्र लिंग रूपों में 10 मई से 21 मई 2000 ई। के बीच विभिन्न तरह की आकृतियां उभर आयीं। इस अलौकिक चमत्कार को नमस्कार करने के लिये श्रद्धालु भक्तों का यहां तांता लगने लगा। पहले शिवलिंग में जहां अर्धनारीश्वर का रूप प्रकट हुआ वहीं दूसरे रूप में प्रभु श्री राम का सिंहासन, जबकि रुद्र के रूप में स्थापित तीसरे शिवलिंग में पहाड़ लेकर जा रहे बजरंग बली तथा शंकर के रूप में स्थापित चौथे शिवलिंग में श्री कृष्ण के सुदर्शन चक्र, बांसुरी व बाजूबंद की आकृति उभर आयी वहीं नील लोहित रूप में स्थापित शिवलिंग में नाग एवं ऊँ की आकृति ईशान के रूप में स्थापित छठे शिवलिंगों में भी विभिन्न तरह की आकृतियां उभर आयीं।

गौरतलब है कि प्रसिद्ध तांत्रिक पंडित मुनीश्वर झा ने 1953 ई। में यहां शिव मंदिर की स्थापना की थी। इस मंदिर में स्थापित सभी शिवलिंग काले ग्रेनाइट पत्थर के बने हुए हैं जिनका प्रत्येक सोमवार शाम को दूध, दही, घी, मधु, पंचामृत, चंदन आदि से स्नान होता है। श्रृंगार के लिये विशेष तौर पर कोलकाता से कमल के फूल मंगाये जाते हैं। प्रधान पुजारी कहते हैं कि जो व्यक्ति अपने पितरों का पिंडदान करने नहीं गया नहीं जा पाते उनके लिये यहां गया क्षेत्र बना है जहां पिण्डदान कर मुक्ति पायी जाती है।

एक साथ कई देवी देवताओं के दर्शन होते हैं मंगरौनी में आम-महुआ वृक्ष का आलिंगन-बद्ध स्वरूप मिथिलांचल में वर-वधू का दांपत्य जीवन दीर्घायु होने की कामना के लिये आम-महुआ का विवाह कराने की परंपरा अति प्राचीन काल से चली आ रही है। एकादश रुद्र मंदिर परिसर में आम- महुआ वृक्ष का आलिंगन बद्ध स्वरूप देख जहां लोग अचंभित हो जाते हैं, वहीं दंपति इस वृक्ष की पूजा- अर्चना कर अपने दांपत्य जीवन के सुखमय होने की कामना करते हैं। वधुएं हमेशा सुहागन रहने व पति के दीर्घायु होने तथा जन्म-जन्म तक साथ निभाने हेतु इस वृक्ष की पूजा करने के लिये दूर-दूर से आती हैं। आम- महुआ पेड़ का ये आलिंगन-बद्ध स्वरूप दुर्लभ माना जाता है। एक नहीं बल्कि तीन- तीन जगह ये दोनों वृक्ष आलिंगन-बद्ध हैं।

देव सभा : एक साथ विष्णु के सभी अवतारों का दर्शन एकादश रुद्र मंदिर आने वाले शिव भक्तों को इसी परिसर में एक साथ विष्णु के कई अवतारों का दर्शन करने का सौभाग्य भी प्राप्त होता है। बेशकीमती व दुर्लभ काले ग्रेनाइट व सफेद संगमरमर से बने विष्णु के विभिन्न रूपों कीआकर्षक प्रतिमाएं देख श्रद्धालु भक्त दंग रह जाते हैं तथा असीम श्रद्धा व आस्था पूर्वक पूजा- अर्चना करते हैं। राधा कृष्ण, बाला जी, नर-नारायण, सीता-राम, लक्ष्मी नारायण, विष्णु, वामन अवतार कमल नयन, सूर्य, महावीर,

बुद्ध, लड्डु गोपाल समेत विभिन्न स्वरूपों के सैकड़ों मूर्तियां छोटे व बड़े आकार के एक साथ यहां स्थापित है। इतने देवी-देवताओं का एक साथ दर्शन करने का सौभाग्य केवल मधुबनी स्थित मंगरौनी एकादश रुद्र मंदिर में ही श्रद्धालुओं का प्राप्त होता है।

महाकाल व महाकाली के दर्शन

एकादश रुद्र का दर्शन करने आने वाले श्रद्धालु भक्तों को महाकाल व महाकाली का भी दर्शन व पूजन का सौभाग्य प्राप्त होता है। महाकाल ने जो रूप धारण किया है एकादश रुद्र मंदिर परिसर में वही रूप स्थापित किया गया है। महाकाल व महाकाली की प्रतिमाएं भी काले ग्रेनाइट पत्थर की बनी हुई हैं। ये प्रतिमाएं अद्भुत व अलौकिक हैं। कहते हैं कि इनके दर्शन मात्र से सभी पाप नष्ट हो जाते है। वैसे तो इनकी प्रति दिन पूजा होती है लेकिन काली पूजा के अवसर पर इनका विशेष पूजन पंडित आत्मा राम व उनकी धर्मपत्नी श्रीमती भुवनेश्वरी देवी द्वारा षोडषोपचार पूजन किया जाता है। एकादश रुद्र मंदिर से सटे पूर्व एवं दक्षिण दिशा में देव सभा का मंदिर है मंदिर के द्वार से सटे उत्तर में बजरंगबली हनुमान जी की मूर्ति स्थापित है। इनकी पूजा-अर्चना का सौभाग्य भी यहां आने वाले भक्तों को प्राप्त होता है।

विघ्न हरण के लिये गणेश का दर्शन

एकादश रुद्र मंदिर दर्शन को आने पर सबसे पहले दुर्गा माता की सवारी सिंह व भोले बाबा की सवारी बसहा का दर्शन भी भक्तों को सहज हो जाता है। मंदिर के बायीं तरफ दुर्गा माता की सवारी सिंह एवं दूसरी तरफ भोले बाबा की सवारी बसहा को स्थापित किया गया है। सिंह व बसहा की विशालकाय जीवंत प्रतिमाएं देख एक बार भी शिव भक्त दांतों तले अंगुली दबाने पर विवश हो जाते हैं। मंदिर के प्रवेश द्वार एवं सीढ़ी के बीच इन दोनों प्रतिमाओं को स्थापित किया गया है। इनके दर्शन के बाद विघ्नहर्ता श्री गणेश का दर्शन भी शिव भक्तों को सहज हो जाता है। एकादश रुद्र मंदिर के मुख्य प्रवेश द्वार एवं निकास द्वार के मध्य गणेश की प्रतिमा स्थापित की गयी है। शिव भक्त श्री गणेश की पूजा अर्चना कर उनसे विघ्न हरने की कामना करते है।

मनोकामना करनी हो पूरी, तो एकादश रुद्र का दर्शन जरूरी

1 महादेव – विगत 30 जुलाई 2001 को अर्द्धृ-नारीश्वर का रूप प्रकट हुआ है। कामाख्या मनाई का ये भव्य रूप है। पांचवें सोमवारी के दिन गणेश जी गर्भ में प्रकट हुए। शिवलिंग पर ये रूप स्पष्ट नजर आती है।

2 शिव – प्रभु श्री राम ने कहा था कि मैं ही शिव हूं। इस लिंग में सिंहासन का चित्र उभरा है, जो प्रभु श्री राम का सिंहासन दर्शाता है।

3 रुद्र – भय को हराने वाले इस लिंग में बजरंगबली पहाड़ लेकर उड़ रहे है बड़ा ही अद्भुत चित्र प्रकट हुआ है।

4 शंकर – गीता के दसवें अध्याय में श्री कृष्ण ने कहा है कि मैं ही शंकर हूं। इस लिंग में श्री कृष्ण का सुदर्शन चक्र, बांसुरी और बाजूबंध स्पष्ट दृष्टिकोण होता है।

5 नील लोहित- जब महादेव ने विषपान किया था, तब उनका नाम नील लोहित पड़ गया था। इस लिंग में सांप एवं ऊँ का अक्षर प्रकट हुआ है।

6 ईशान – हिमालय पर निवास करने वाले महादेव जिसे केदारनाथ कहते हैं विगत नौ जुलाई 2001 सावन के पहले सोमवार को राजराजेश्वरी का रूप प्रकट हुआ।

7 विजय – इस शिवलिंग में छवि बन रही है जिस कारण आकृति अस्पष्ट है।

8 भीम – महादेव का एक रूप भी है। इस शिवलिंग में गदा की छवि उभर कर सामने आयी है। गदा का डंडा अभी धीरे-धीरे प्रकट हो रहा है।

9 देवादेव – ये लिंग सूर्य का रूप है। इस शिवलिंग में गदा के नीचे दो भागों से सूर्य की किरणें फूटकर शीर्ष में मिल रही है। साथ ही त्रिशूल का भी चित्र स्पष्ट दृष्टिगोचर होता है।

10 भवोद्भव – इस लिंग में उमा शंकर की आकृति प्रकट हुई है। दोनों आकृतियां धीरे-धीरे बढ़ रही है।

11 कपालिश्च- महादेव का एक रूप बजरंगबली है। बाबा आत्माराम का कहना है कि बजरंगबली ब्रह्मचारी थे, इसलिये संभवतः इस लिंग में कोई चित्र नहीं उभर रहा है। किसी दिन ये शिवलिंग अपने आप पूरा लाल हो जायेगा।

बाबा जी का कहना है कि सभी शिव भक्तों को मात्र एक बार आकर इन शिवलिंगों उभरी हुई आकृतियों को देखे तो पता लगेगा कि ऐसे शिवलिंग विश्व में कहीं भी नहीं हैं।

देवताओं की नगरी

एकादश रुद्र स्थान को विशेष पूजन स्थल का दर्जा हासिल है तो उसकी वजह ये भी है कि वहां कई देवताओं का दर्शन एक साथ हो जाते हैं। शिव के विभिन्न रूपों का दर्शन तो होता ही है साथ ही हिन्दू धर्म के अन्य अनेकों देवी देवताओं का भी दर्शन होता है। यही कारण है कि यहां आने वाले लोग कहते हैं कि एकादश रुद्र में अलग ही आकर्षण है जो शिव भक्तों समेत अन्य श्रद्धालु भक्तों को खींचता है।

क्या खरीदें

एकादश रुद्र का दर्शन करने के लिये यदि आप अन्य प्रांतों व देशों से आते हैं तो यहां विश्व प्रसिद्ध मिथिला पेंटिंग की खरीदारी मधुबनी एवं आसपास के गांवों से कर सकते हैं। सिक्कीमौनी व जूट से बनी विभिन्न कलात्मक चीजों की भी खरीदारी कर सकते है।

कहां ठहरें

यदि आप दूर-दराज से यहां आते हैं और रात में ठहरना चाहते हैं तो एकादश रुद्र मंदिर से 2।5 किमी दूर स्थित जिला मुख्यालय मधुबनी के सुमन्ता होटल, सिंहानियां होटल आदि में ठहर सकते है।

कब आयें

वैसे तो आप यहां दर्शन व पूजन को कभी भी आ सकते हैं लेकिन रुद्राभिषेक व षोडषोपचार पूजन को आना चाहते हैं तो सोमवार के दिन आना विशेष शुभ है। यदि सावन माह की सोमवारी हो तो अद्वितीय अवसर माना जाता है।

कैसे आयें

मधुबनी जिला मुख्यालय से सटे 2।5 किमी दूरी पर मधुबनी खोईर राजनगर पथ पर मंगरौनी गांव में कुटी चौक के समीप पक्की सड़क के बगल स्थित महादेव मंदिर तक जाने के लिये रिक्शा, टेम्पू, टमटम, दो पहिया वाहन, ट्रैक्टर आदि की सुविधा मधुबनी से है, जबकि मधुबनी आने के लिये बस एवं रेलवे की सुविधा उपलब्ध है। मधुबनी से पैदल चलकर भी मंगरौनी स्थित एकादश रुद्र महादेव का दर्शन किया जा सकता है। पैदल चलकर एकादश रुद्र के दर्शन व पूजन का विशेष महत्व माना गया है।

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Rajender Singh Gusain

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