नाव पर सवार होकर आईं देवी : जब माँ नौका पर आती हैं तो सारी मनोकामनाएं पूरी होती हैं

New Delhi : 25 मार्च बुधवार से चैत्र नवरात्र की शुरुआत हो रही है। इसे वासंती नवरात्र भी कहा जाता है। क्योंकि ये वसंत ऋतु मेंआते हैं। देवी भागवत ग्रंथ के अनुसार वैसे तो मां दुर्गा का वाहन सिंह है, लेकिन इसी ग्रंथ में बताया है कि हर साल नवरात्र पर देवी अलगअलग वाहनों पर सवार होकर धरती पर आती हैं।

देवी के अलगअलग वाहनों पर सवार होकर आने से देश और जनता पर इसका असर भी अलगअलग होता है।

शशिसूर्ये गजारूढ़ा शनिभौमे तुरंगमे। 

गुरौ शुक्रे चदोलायां बुधे नौका प्रकी‌र्त्तिता ।।

सोमवार या रविवार को घट स्थापना होने पर मां दुर्गा हाथी पर सवार होकर आती हैं। शनिवार या मंगलवार को नवरात्रि की शुरुआत होनेपर देवी का वाहन घोड़ा माना जाता है।

गुरुवार या शुक्रवार को नवरात्र शुरू होने पर देवी डोली में बैठकर आती हैं।

बुधवार से नवरात्र शुरू होने पर मां दुर्गा नाव पर सवार होकर आती हैं।

माता दुर्गा जिस वाहन से पृथ्वी पर आती हैं, उसके अनुसार सालभर होने वाली घटनाओं का भी आंकलन किया जाता है।

गजे जलदा देवी क्षत्र भंग स्तुरंगमे।

नोकायां सर्वसिद्धि स्या ढोलायां मरणंधुवम्।।

देवी जब हाथी पर सवार होकर आती है तो पानी ज्यादा बरसता है। घोड़े पर आती हैं तो पड़ोसी देशों से युद्ध की आशंका बढ़ जाती है।देवी नौका पर आती हैं तो सभी की मनोकामनाएं पूरी होती हैं और डोली पर आती हैं तो महामारी का भय बना रहता हैं।

कौन से वाहन पर सवार होकर जाती हैं देवी

माता दुर्गा आती भी वाहन से हैं और जाती भी वाहन से हैं। यानी जिस दिन नवरात्र का अंतिम दिन होता है, उसी के अनुसार देवी का वाहनभी तय होता है। देवी भागवत के अनुसार

शशि सूर्य दिने यदि सा विजया महिषागमने रुज शोककरा।

शनि भौमदिने यदि सा विजया चरणायुध यानि करी विकला।।

बुधशुक्र दिने यदि सा विजया गजवाहन गा शुभ वृष्टिकरा।

सुरराजगुरौ यदि सा विजया नरवाहन गा शुभ सौख्य करा॥

रविवार या सोमवार को देवी भैंसे की सवारी से जाती हैं तो देश में रोग और शोक बढ़ता है। शनिवार या मंगलवार को देवी मुर्गे पर सवारहोकर जाती हैं, जिससे दुख और कष्ट की वृद्धि होती है।

बुधवार या शुक्रवार को देवी हाथी पर जाती हैं। इससे बारिश ज्यादा होती है।

गुरुवार को मां दुर्गा मनुष्य की सवारी से जाती हैं। इससे जो सुख और शांति की वृद्धि होती है।

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