लोन दिलाने के बहाने 350 लोगों से लाखों ठगे, दो गिरफ्तार

लोन दिलाने के बहाने 350 लोगों से लाखों ठगे, दो गिरफ्तार

By: shailendra shukla
January 13, 21:01
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New Delhi: सरकार द्वारा तमाम प्रकार से चेताए जाने के बाद भी लोग ठगों के झांसे में आ जाते हैं। कभी लोन के नाम पर तो कभी एटीएम से पैसे निकाल लिए जाते हैं।

ताजा मामले में दिल्ली पुलिस ने ऐसे दो ठगों को गिरफ्तार किया है जो लोन दिलाने के बहाने लोगों से रकम ऐठकर फरार हो जाते थे। प्रधानमंत्री स्वराज योजना और सरकारी स्कीमों के नाम पर लोनदिलाने के बहाने लोगों को ठगने के आरोप में 2 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। जांच में पता लगा है कि वे अब तक 350 से अधिक लोगों को ठग चुके हैं। एक से दो महीने में आरोपी ठिकाना बदल लेते थे। उन्होंने एक कॉल सेंटर भी खोल रखा था, जहां से लोन दिलाने के लिए फोन किए जाते थे। 

लोन के बहाने ठगी (प्रतीकात्मक तस्वीर)

मामला राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के मायापुरी थाना क्षेत्राधिकार का है। डीसीपी विजय कुमार ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों में मंगोलपुरी कलां का रहने वाला संदीप (25) और अवंतिका रोहिणी सेक्टर-1 का रहने वाला आयुष दीक्षित (22) शामिल है। इनमें से संदीप गैंग का मास्टरमाइंड हैं। उसने डीयू से इलेक्ट्रॉनिक्स ऐंड कम्यूनिकेशन में डिप्लोमा किया है। आयुष 12वीं पास है और कॉल सेंटर में फोन करने का काम करता था।

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पुलिस ने बताया कि इन लोगों ने पिछले करीब एक साल में 350 से अधिक लोगों को लोन दिलाने के नाम पर उनसे 50 लाख रुपये से अधिक ठग लिए। पुलिस का कहना है कि 23 नवंबर को खजान बस्ती की एक महिला ने मायापुरी थाने में लोन के नाम पर ठगे जाने की शिकायत की थी। उन्होंने बताया था कि 17 नवंबर को उनके पास एक फोन आया था। कॉलर ने उनसे लोन लेने की बात कही थी। हां कहने पर कॉलर ने उनसे फाइल और बाकी के रूप में 20 हजार रुपये लिए।

पुलिस ने दो ठगों को गिरफ्तार किया है

इसके बाद कॉलर ने कहा कि लोन पास हो गया है और अगले दिन बैंक अकाउंट में 4 लाख रुपये आ जाएंगे। हालांकि पैसा नहीं आया। इसके बाद उसने फिर कुछ पैसा मांगा। उनसे कुल 55 हजार रुपये ठगे गए। बाद में फोन करने पर नंबर भी स्विच ऑफ आने लगा। इसकी शिकायत उन्होंने मायापुरी पुलिस से की। थाने के एसएचओ राजकुमार और एसआई पंकज कुमार की टीम ने दोनों को गिरफ्तार कर लिया।

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पुलिस पूछताछ और जांच में पता लगा कि उन्होंने रोहिणी में एक थ्री बीएचके फ्लैट किराए पर ले रखा था। लोगों को ठगने के लिए कॉल सेंटर चलाते थे। उन्होंने 4 लोगों को नौकरी पर रखा था। उन्हें 7 हजार से 10 हजार रुपये महीने तक दिए जाते थे। पुलिस का कहना है कि मामले का मास्टरमाइंड संदीप सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहा था। जब नौकरी नहीं मिली तो उसने लोन दिलाने के नाम पर ठगी का धंधा शुरू कर दिया।

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