कोरोना को जीता- मिलिये देश की उन 5 महिला IAS अफसरों से जिन्होंने कोरोना को दिया धोबी पछाड़

New Delhi : भारत का कोई राज्य आज ऐसा नहीं है जहां कोरोना के मामलों की संख्या हजारों में न हो। वहीं कुछ राज्यों में तो स्थिति ज्यादा गंभीर हो चुकी है। इस स्थिति से निपटने के लिये जिले और निगम स्तर पर तैयारियां करना बेहद जरूरी हो जाता है और इन तैयारियों में महत्वपूर्ण भूमिका के रूप में हमारे प्रशासनिक अधिकारियों की टीम काम कर रही है। आज हम आपको ऐसी ही पांच महिला आईएएस अधिकारी के बारे में बताएंगे जिन्होंने न केवल कोरोना महामारी को फैलने से रोका बल्कि लगातार उस ओर प्रयास कर रही हैं।

टीना डाबी- 2015 की यूपीएससी टॉपर रही टीना डाबी ज्यादा अनुभवी नहीं है लेकिन जैसे ही उन्होंने अपना पदभार संभाला तो उनके काम की काफी तारीफ हुई। राजस्थान के भीलवाड़ा जिले की जिम्मेदारी संभाल रही टीना के लिये तब चुनौती भरा समय आया जब देश में सबसे पहले भीलवाड़ा कोरोना हॉटस्पॉट के रूप में चिह्नि्हित किया गया। लेकिन टीना ने इस तरह से इस चुनौती का सामना किया कि महीने भर में ही स्थिति काबू में आ गई। इसके बाद उनका ये काम देश भर में भीलवाड़ा मॉ़डल के नाम से प्रशिद्ध हुआ। 25 मार्च को देशव्यापी तालाबंदी से पहले जिला प्रशासन ने पूरी तरह से भीलवाड़ा को बंद कर दिया। टीना ने संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) परीक्षा 2015 में पहली रैंक हासिल की। ​​उन्होने डीयू के लेडी श्रीराम कॉलेज से राजनीति विज्ञान में स्नातक किया है। उन्होंने 2018 में IAS प्रशिक्षण के लिए राष्ट्रपति द्वारा गोल्ड मेडल।

बीला राजेश- 1997 बैच की आईएएस अधिकारी, बीला राजेश तमिलनाडु की स्वास्थ्य सचिव हैं। वायरस से प्रभावित लगभग 33 जिलों की निगरानी के लिये राज्य सरकार द्वारा नियुक्त 36 सदस्यीय IAS टीम का हिस्सा हैं। वह 18 जून से कृष्णगिरि जिले को देख रही हैं।
एनीस कनमनी जॉय- एनीस कर्नाटक के कोडागु जिले की जिम्मेदारी संभाल रही हैं। एनीस कनमनी जॉय को लगातार 28 दिनों तक अपने जिले में कोई मामला दर्ज न होने पर उनके काम की काफी तारीफ हुई। जिले में वायरस को रोकने के लिये सख्त प्रोटोकॉल थे। 19 जुलाई तक, कोडागु में 140 मामले आये हैं। IAS अधिकारी बनने से पहले, एनी ने एक नर्स के रूप में काम किया था। उन्होंने कई चुनौतियों का सामना किया है, जिसमें कई साल पहले जिले में हुए भूस्खलन और बाढ़ भी शामिल हैं। एनीस 2012 में IAS अधिकारी के रूप में चयनित होने वाली पहली नर्सों में से एक बनी।

सृजना गुम्माला- सृजना गुम्माला ग्रेटर विशाखापट्टनम से IAS अधिकारी हैं।काम के प्रति इतनी समर्पित हैं कि कोरोना महामारी को देखते हुए वे मां बनने के 22 दिन बाद ही वापस अपने काम पर लौट आईं। इतना ही नहीं काम के समय वह अपने 1 महीने के बच्चे को भी साथ लेकर आती थी। उनकी ये तसवीर सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुई। साल 2013 बैच की आईएएस सृजना ने परिवार से पहले अपने कर्तव्य को आगे रखा और कोरोनावायरस महामारी के खिलाफ जारी लड़ाई में शामिल हो गई।
राजेश्वेरी बी- राजेश्वेरी बी, दुमका, झारखंड की डिप्टी कमीश्नर हैं। वह इन दिनों जरूरतमंदों की मदद करने और कोरोना वायरस के प्रसार को रोकने के उपायों को लागू करने के लिए काम कर रही हैं। राजेश्वरी ने जिले में जरूरतमंदों की मदद करने और वायरस के प्रसार को रोकने के उपायों को लागू करने के लिये काम कर रही हैं। आईएएस अधिकारी यह सुनिश्चित करते रहे हैं कि वृद्ध लोगों को उनके घर के दरवाजे पर आवश्यक वस्तुएं प्राप्त हों। उन्होंने 80 वर्षीय लक्ष्मी देवी की मदद की, जो एक निःसंतान विधवा थी, जो गठिया से पीड़ित थी और पैसो की कमी के चलते उनके पास भोजन नहीं था।

अपने रिश्तेदारों से एक कॉल प्राप्त करने के बाद, राजेश्वरी ने यह सुनिश्चित किया कि एक घंटे के भीतर भोजन अनिवार्य रूप से उसके घर भेजा जाए। इसके अलावा, वह शहर में स्थिति की निगरानी कर रही है और सभी उपायों का पालन सुनिश्चित कर रही है।

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