विधान के विपरीत, सबसे छुपाकर हाथरस की बेटी का क्रिया-कर्म करा दिया, चेहरा भी न देख सकी मां

New Delhi : हाथरस की बेटी को उसके गांव तो ले जाया गया लेकिन घर तक नहीं पहुंचने दिया गया। मां तो अंतिम बार उसका चेहरा भी नहीं देख सकी। सरकार ने उसका क्रियाकर्म देर रात ढाई बजे करवा दिया। माहौल को शांत करने के लिये ऐसा किया गया। लेकिन ऐसा लग नहीं रहा है कि इससे माहौल शांत हुआ हो। सोशल मीडिया पर योगी सरकार की थू-थू हो रही है। यूपी पुलिस की भी लोग लानत मलामत कर रहे हैं। लोगों के गुस्से के शिकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी हैं। लोग इस गंभीर मसले की अनदेखी का आरोप प्रधानमंत्री पर लगा रहे हैं। तमाम विपक्षी पार्टियों ने सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। हाल तक भाजपा के हर काम की तारीफ कर रहीं बसपा प्रमुख मायावती भी मुखर हो गईं हैं। भीम सेना ने तो आगे बढ़कर मोर्चा संभाल लिया है।

पूरे देश में हाथरस की घटना को लेकर एक हूक उठी है। पीड़ित की मां ने अपना दर्द कुछ यूं बयां किया- उसके पापा तो उसको दर्द में देख ही नहीं पा रहे थे। अंतिम बार भी देख नहीं सके। पुलिस ने हमें उसका चेहरा तक नहीं देखने दिया। हमें नहीं पता पुलिस ने क्यों, कैसे और क्या किया। पीड़ित के बड़े भाई ने कहा- महिला पुलिसकर्मियों ने हमारे घर की महिलाओं के साथ मारपीट की। रिश्तेदारों को गांव नहीं आने दिया। जबर्दस्ती रात में ही अंतिम संस्कार कर दिया। हम उनसे विनती करते रहे कि सुबह होने के इंतजार करें, लेकिन हमारी एक नहीं सुनी। हमारे रीति-रिवाजों का ख्याल भी नहीं रखा।
इधर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ट‍्वीट किया- हाथरस में बालिका के साथ घटित दुर्भाग्यपूर्ण घटना के दोषी कतई नहीं बचेंगे। प्रकरण की जांच के लिये विशेष जांच दल का गठन किया गया है। यह दल आगामी सात दिन में अपनी रिपोर्ट देगा। त्वरित न्याय सुनिश्चित करने हेतु इस प्रकरण का मुकदमा फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलेगा। आदरणीय प्रधानमंत्री श्री @narendramodi जी ने हाथरस की घटना पर वार्ता की है और कहा है कि दोषियों के विरुद्ध कठोरतम कार्रवाई की जाये।

डा. कुमार विश्वास ने ट‍्वीट किया- सूर्यास्त के बाद, विधान के विपरीत, घरवालों से छुपाकर, जबरन, अपनी सरकार व पुलिस के बल पर गुपचुप तरीक़े से “हम सदा शासक रहेंगे” की सोचवाले अहंकारी अंग्रेजों ने शहीद ए आज़म भगतसिंह, सुखदेव व राजगुरु को बिना अंतिम संस्कार किये विदा किया था।

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