अभी आपको और सताएगा पेट्रोल, 100 रुपए प्रति लीटर तक जा सकते हैं दाम... कुछ ऐसा है पूरा गणित

अभी आपको और सताएगा पेट्रोल, 100 रुपए प्रति लीटर तक जा सकते हैं दाम... कुछ ऐसा है पूरा गणित

By: Rohit Solanki
October 05, 18:10
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 New Delhi: भारत की राजनीति के लिए कच्चा तेल 2012 से लेकर 2017 के बीच गेमचेंजर साबित हुआ है। पिछली सरकार ने दुनियाभर में कच्चे तेल के दाम चढ़ने के बाद पेट्रोल- डीजल की कीमतें इतनी बढ़ा दी कि 2014 में महंगाई का मुद्दा इतना उछल गया, जिससे कांग्रेस को अपनी कुर्सी गंवानी पड़ी। लोकसभा चुनाव के नतीजे आते समय तक कच्चे तेल के दाम वैश्विक स्तर पर लुढ़क गए और UPA सरकार में 125 डॉलर की कीमत वाला कच्चा तेल 30 डॉलर प्रति बैरल तक आ गया।

चुनाव में जीत के बाद तेल की कीमतें नई सरकार के लिए वरदान साबित हुई। सरकार बनने के बाद एक वक्त ऐसा आया जब 76 रुपए का आंकड़ा छू चुका पेट्रोल 56 रुपए पर आ गया। लोग समझने लगे की पेट्रोल के दाम में 20 रुपए की गिरावट आने से जनता ने राहत की सांस जरूर ली, लेकिन ये ज्यादा दिनों तक टिकी नहीं रही। अब एक बार फिर वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल के दाम ने तेजी पकड़ ली है, जिस वजह से अनुमान है कि भारत में पेट्रोल की कीमत 100 रुपए प्रति लीटर का आंकड़ा छू सकता है।

अब अगर वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल के दाम की बात करें तो 2012 की शुरुआत में मनमोहन सिंह देश के प्रधानमंत्री थे। उस समय कच्चे तेल की कीमत इंटरनेशनल मार्केट में 125 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी। मनमोहन सरकार जाते-जाते तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल तक आ गई थी और यहीं से गिरावट का दौर शुरू हुआ। दिसंबर 2015 तक कच्चे तेल के दाम 50 डॉलर प्रति बैरल, यानि दाम आधे हो गए। जनवरी 2016 तक कच्चे तेल की कीमतें सबसे ज्यादा गिरकर अपने न्यूनतम स्तर 30 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई। आपको बता दें कि कच्चे तेल की कीमतें केन्द्र सरकार के खजाने से खर्च का सबसे बड़ा और सबसे अहम खर्च है। यहां बचा हुआ एक-एक पैसा सरकार को अपनी आर्थिक-सामाजिक नीतियों को आगे बढ़ाने के काम आता है।

कीमतें तय करने का बदला गणित: देश में पेट्रोल की कीमतें निर्धारित करने का नियम नई सरकार ने बदल दिया। पहले हर महीने इंपोर्ट कॉस्ट के आंकलन के साथ टैक्स जोड़कर हर दो माह पर पेट्रोल की कीमत निर्धारित की जाती थी। इसके बाद इस फॉर्मूले पर पेट्रोल की कीमत हर महीने और फिर हर हफ्ते निर्धारित किया जाने लगा। लेकिन पिछले दो महीने से ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल के हर-दिन उतार-चढ़ाव और देश में टैक्स के आंकलन से प्रति दिन पेट्रोल की कीमत निर्धारित की जाती है। इसी वजह से इन 3 साल के दौरान क्रूड की कीमतों में भारी फेरबदल से पेट्रोल की कीमत में भी उतार-चढ़ाव का सिलसिला बना रहा है।

सरकारी खजाना हुआ मालामाल: 2012 में जब कच्चे तेल की कीमत टॉप पर थी, उस वक्त दिल्ली में प्रति लीटर पेट्रोल 73 रुपये से 67 रुपये प्रति लीटर के बीच बिक रहा था। वहीं जब 2014 में कच्चे तेल की कीमतों में फिसलन शुरू हुई तो पूरे साल दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 73 रुपये से 63 रुपये प्रति लीटर के बीच बेचा गया। 2014 की इस फिसलन का आम आदमी को पहला फायदा 2015 में मिलना शुरू हुआ। जब कच्चा तेल 30 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया, तब दिल्ली में पेट्रोल की कीमत पहली बार 60 रुपये प्रति लीटर के नीचे गई। हालांकि 2015 में पेट्रोल की कीमत 66 रुपये से 60 रुपये प्रति लीटर के बीच रही। अक्टूबर 2016 तक सस्ते पेट्रोल का खेल खत्म हो गया और यहां से एक बार फिर पेट्रोल की कीमतें बढ़नी शुरू हुई। इस दौरान एक लीटर पेट्रोल की कीमत वापस 66 रुपये से बढ़कर 70 रुपये के स्तर पर पहुंच गई और साल 2017 के दौरान एक बार फिर पेट्रोल की कीमत 70 रुपये प्रति लीटर से 63 रुपये प्रति लीटर पर पहुंच गई।

  इस बीच वैश्विक संस्था ऑर्गेनाइजेशन फॉर इकोनॉमिक कोऑपरेशन एंड डेवलपमेंट (OECD) की भविष्यवाणी है कि मौजूदा वैश्विक आर्थिक स्थिति में 2020 तक कच्चे तेल की कीमत 270 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकती है। आपको बता दें कि 2008 में कच्चे तेल अब तक के सर्वाधिक स्तर 145 डॉलर प्रति बैरल पर थी। वहीं 2015 और 2016 के दौरान खाड़ी देशों में जारी विवाद और चीन समेत विकासशील देशों में मांग की कमी के चलते कच्चे तेल की कीमत 30 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गई। ओईसीडी की यह भविष्यवाणी का आधार है कि आने वाले वर्षों में चीन और भारत जैसी अर्थव्यवस्थाएं रफ्तार पकड़ने के लिए इंधन के मांग में बड़ा इजाफा कर सकती है।

हालांकि, भारत में पेट्रोल की कीमत 100 रुपये का पार जाने के लिए ये जरूरी नहीं कि कच्चा तेल 270 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को छुए। बीते तीन साल तक देश में क्रूड की कीमत और केन्द्र और राज्य सरकारों द्वारा लिया जा रहा टैक्स पेट्रोल की कीमत को उसी समय 100 रुपये तक पहुंचा सकता है जब एक बार फिर कच्चे तेल 2014 के स्तर यानी 100 डॉलर प्रति बैरल को छू ले।

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