मेक इन इंडिया 2.0 लॉन्च करेगी मोदी सरकार, रोजगार बढ़ाने के लिए बनेगी योजनाएं

मेक इन इंडिया 2.0 लॉन्च करेगी मोदी सरकार, रोजगार बढ़ाने के लिए बनेगी योजनाएं

By: Aryan Paul
January 12, 08:01
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New Delhi: मोदी सरकार मेक इन इंडिया प्रोग्राम का दूसरा चरण अगले महीने शुरू करेगी। 

इस बार इसका जोर रोबॉटिक्स, जीनोमिक्स, केमिकल फीडस्टॉक और इलेक्ट्रिकल स्टोरेज जैसे सेगमेंट्स पर होगा। एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, इंडस्ट्री डिपार्टमेंट मेक इन इंडिया 2.0 में कवर किए जाने वाले हर सेक्टर के लिए 5 साल का रोडमैप तैयार कर रहा है।

मेक इन इंडिया

अधिकारी ने कहा कि वे चाहते हैं कि मेक इन इंडिया के तहत भविष्य की बातों पर ज्यादा जोर दिया जाए और कुछ वर्षों में वैश्विक स्तर पर आने वाले अवसरों के लिए हम तैयार हो सकें। अधिकारी ने बताया कि सरकार मौजूदा व्यवस्था का उपयोग करते हुए सूचनाएं जुटाएगी और नए चरण के लिए रणनीति बनाएगी। 

इंडिया

बता दें कि PM मोदी ने सितंबर 2014 में मेक इन इंडिया प्रोग्राम शुरू किया था। अब तक इसका फोकस ऑटोमोबाइल, टेक्स्टाइल्स, कंस्ट्रक्शन और एविएशन सहित 25 सेक्टरों पर रहा है। इसका मकसद इन क्षेत्रों में लोकल मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देना और रोजगार के मौके बनाना है। दूसरे चरण के शुरू होने से पहले हाल यह है कि मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्री में भी दिक्कतें कम नहीं होने का नाम ले रही हैं। 

केंद्रीय सांख्यिकी विभाग

केंद्रीय सांख्यिकी विभाग के मुताबिक, 2017-18 में देश के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की ग्रोथ 4.6 पर्सेंट रहने की उम्मीद है। इससे पहले साल का आंकड़ा 7.9 पर्सेंट था। हाल में संपन्न हुए शीत सत्र के दौरान वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री सुरेश प्रभु ने संसद को बताया था कि मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर का प्रदर्शन डोमेस्टिक डिमांड, एक्सपोर्ट्स डिमांड, इन्वेस्टमेंट और कीमतों जैसे कई पहलुओं पर निर्भर करता है। 

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मेक इन इंडिया

औद्योगिक नीति एवं संवर्द्धन विभाग अब चाहता है कि मेक इन इंडिया प्रोग्राम का फोकस ऐसे कुछ क्षेत्रों पर बढ़े, जिनमें भारत को ग्लोबल सप्लाई चेन में लंबी अवधि में आगे ले जाने की क्षमता हो। सरकार देखेगी कि हर सेक्टर के लिए केंद्र और स्थानीय स्तर पर कैसी नीतियों की जरूरत होगी। इसमें देखा जाएगा कि फिस्कल कंसेशन और सिंगल विंडो अप्रूवल मेकनिजम सहित कौन से उपाय किए जा सकते हैं। 

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मेक इन इंडिया

अधिकारियों के मुताबिक, दूसरे चरण में विभाग परियोजनाओं पर नजर रखने वाले दल बनाया जाएगा। इनमें तीन से चार सदस्य होंगे। ये दल प्रोग्राम की प्रगति की समीक्षा करेंगे और 10-12 महीनों में अपनी रिपोर्ट देंगे। 

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