ज्योतिष बोला-तुमसे न हो पायेगा टाइमपास न करो, लेकिन किसान के बेटे ने पहली बार में IAS टॉप किया

New Delhi : जब किसी व्यक्ति के जीवन में काम बनते-बनते बिगड़ने लगते हैं, जब हर मेहनत के परिणाम के रूप में असफलता ही हाथ लगती है तो वह टूटने लगता है और अपने भाग्य को दोष देने लगता है। लेकिन कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो विश्वास रखते हैं कि अगर मेरे भाग्य में समस्याएं ही लिखी हैं तो मैं अपनी मेहनत और दृढ़ संकल्प से उन समस्याओं को हराकर अपना भाग्य बदलकर अपने हिस्से की खुशियां छीन लूंगा। आज हम इसी प्रकार के एक व्यक्तित्व के बारे में बात कर रहे हैं जिनका नाम है नवजीवन विजय पवार।

आज वे आईएएस अधिकारी हैं। उन्होंने 2018 की यूपीएससी परीक्षा में ऑलओवर 316वीं रेंक हासिल कर अपने भाग्य को अंगूंठा दिखाया। लेकिन आईएएस बनने से मात्र कुछ ही महीने पहले उनकी जिंदगी बड़ी डांवाडोल थी। उनकी ये कहानी जितना भावुक कर देने वाली है उतनी ही प्रेरणादायी भी है।
नवजीवन महाराष्ट्र के नासिक जिले के एक छोटे से गांव नवीबेज के रहने वाले हैं। उनके पिता किसान हैं। अपने पिता के साथ नवजीवन भी खेती बाड़ी में हाथ बंटाया करते थे। नवजीवन की मां नासिक में ही प्राइमरी स्कूल टीचर हैं। घर में पढ़ाई लिखाई का माहौल था। नवजीवन भी पढ़ने में काफी होशियार थे। उन्होंने गांव से ही 10वीं पास की। जिसके बाद 12वीं भी उन्होंने अच्छे अंकों के साथ पास की। अच्छे अंकों की बदौलत उन्हें महाराष्ट्र के एक इंजीनीयरिंग कॉलेज में एडमिशन मिला यहां से उन्होंने सिविल इंजीनीयरिंग में 2017 में ग्रेजुएशन किया। ग्रेजुएशन करने के तुुरंत बाद ही वो अपने आईएएस बनने के सपने को लेकर दिल्ली आ गए। यहां उन्होंने कोचिंग क्लास जॉइन की और यूपीएससी की तैयारी में पूरी मेहनत के साथ लग गए।
उनकी जिंदगी में संघर्ष तो अब शुरू हुआ। उन्होंने अपने कॉलेज टाइम से ही परीक्षा का पैटर्न और जरूरी बातें समझ ली थी साथ ही वे तैयारी भी कर रहे थे। इसलिए उनका पूरा यकीन था कि वो पहली बार में ही यूपीएससी निकाल देंगे। परीक्षा दी और उनका प्री क्लियर हो गया। लेकिन इसके बाद अचानक उनके स्वास्थ्य में गिरावट आने लगी। मेंस लिखने के एक महीने पहले ही वो हॉस्पीटल में भर्ती हो गए। उन्हें डेंगु हो गया था। यहां से ठीक हुए तो उन्हें फिर डायरिया हो गाय। इसके बाद उनका मोबाईल चोरी हो गया। इतनी घटनाओं के बाद उनके कोचिंग टीचर उन्हें ज्योतिषी के पास लेकर गए। ज्योतिषी ने बोला की तुम 27 साल से पहले कामयाब हो ही नहीं सकते तुम दिल्ली टाइम पास करने आए हो।

ज्योतिषी की बात नवजीवन के मन में बैठ गई और वो डिप्रेशन में रहने लगे। फिर उनके दोस्तों ने कहा कि ऐसा कुछ नहीं होता है। दोस्तों ने हौसला बढ़ाया तो नवजीवन ने भी सोचा कि अब यहां तक तो आ गए हैं अब या अगर हारना भी है तो पूरी ताकत से लड़ते हुए हारा जाएगा। उन्होंने बीमार रहते हुए दिन रात मेहनत की और मेंस परीक्षा के 9 पेपर लिखे। जब उनका रिजल्ट आया तो वो मेंस में भी पास हो गए थे। अब इंटरव्यू बचा था इसे भी उन्होंने पूरे आत्मविश्वास के साथ दिया और फाइनल लिस्ट में जब उनका नाम आया तो दिल्ली से लेकर महाराष्ट्र तक उनके चाहने वालों में खुशी की लहर दौड़ गई।

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