अनुपम खेर ने लिखा- बरखुरदार! हँसना आसान है, हँसाना बहुत मुश्किल! एक और सितारे को अलविदा

New Delhi : बॉलीवुड क्लॉसिक शोले के सूरमा भोपाली को कौन भूल सकता है। एक यादगार फिल्म का यादगार किरदार। इस यादगार किरदार को पर्दे पर अमर कर देनेवाले भारतीय सिनेमा के मशहूर कॉमेडियन जगदीप का देर शाम मुम्बई में निधन हो गया। वे 81 साल के थे। उन्होंने हिंदी सिनेमा में बतौर बाल कलाकार एक्टिंग शुरू की और इंडस्ट्री के टॉप कामेडियन में शुमार हुये। अनुपम खेर ने लिखा- एक और सितारा ज़मीन से आसमान में जा पहुँचा।#Jagdeep साब हिंदी फ़िल्म जगत के एक बहुत ही बेहतरीन कलाकार थे। एक हास्य अभिनेता के नाते उनका कोई सानी नहीं था। एक पार्टी में बहुत साल पहले उन्होंने मुझसे कहा था”बरखुरदार ! हँसना आसान है, हँसाना बहुत मुश्किल है!” आपकी कमी बहुत खलेगी।

फिल्म ‘हम पंछी एक डाल के’ में उनके शानदार अभिनय को देखते हुये पूर्व प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने शानदार उपहार देकर सम्मानित किया था। ‘हम पंछी एक डाल के’ के बाद जगदीप की लोकप्रियता इतनी बढ़ गई थी कि उन्हें मुख्य अभिनेता के तौर पर फिल्मों में काम मिलने लगा। इस फिल्म में उनकी एक्टिंग से नेहरू इतना खुश हुये थे कि जगदीप के लिये अपना पर्सनल स्टाफ नियुक्त कर दिया था।
मध्यप्रदेश के सीएम शिवराज सिंह चौहान ने सूरमा भोपाली के अंदाज में ही उन्हें ट्विटर के जरिये श्रद्धांजलि दी। शिवराज सिंह ने लिखा- अमा सूरमा भाई! आज तो पूरा भोपाल और हर एक भोपाली भी उदास है। मैंने कई भाई, याद बहुते ही आओगे।
अलविदा सूरमा भाई!

जगदीप के दोस्त प्रोड्यूसर महमूद अली ने बताया – बांद्रा स्थित घर में रात करीब 8.30 बजे वे अलविदा कह गये। वह बुढापे के चलते हुई बीमारियों से लंबे समय से परेशान चल रहे थे। जगदीप को गुरुवार सुबह मुंबई के मुस्तफा बाजार मझगांव शिया कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा।
जगदीप 29 मार्च, 1939 को मध्य प्रदेश के दतिया में एक वकील के घर पैदा हुए थे। जगदीप ने अपने फिल्मी करियर की शुरुआत चाइल्ड आर्टिस्ट ‘मास्टर मुन्ना’ के रूप में बी आर चोपड़ा की फिल्म ‘अफसाना’ से की थी। इसके बाद चाइल्ड आर्टिस्ट के रूप में ही उन्होंने ‘लैला मजनूं’ में काम किया। जगदीप ने कॉमिक रोल बिमल रॉय की फिल्म ‘दो बीघा जमीन’ से करने शुरू किये थे। उन्होंने करीब 400 से ज्यादा फिल्मों में काम किया। 2012 में वे आखिरी बार ‘गली गली चोर’ फिल्म में पुलिस कांस्टेबल की भूमिका में नजर आए थे।

1975 में आई शोले में निभाये गये सूरमा भोपाली के किरदार ने उन्हें बॉलीवुड में मशहूर किया था। इस किरदार के नाम पर 1988 में भी फिल्म बनी, उसमें भी मुख्य भूमिका जगदीप ने ही निभाई। इसके अलावा ब्रह्मचारी, नागिन और अंदाज अपना-अपना जैसी फिल्मों में उनकी कॉमेडी को काफी पसंद किया गया। जगदीप ने खुद को उस दौर में स्थापित किया, जब जॉनी वॉकर और महमूद की तूती बोलती थी।
जगदीप पर कई शानदार गाने भी फिल्माये गये हैं। जिसमें से एक – पास बैठो तबीयत बहल जायेगी…. बहुत जबरदस्त हिट साबित हुआ। फिल्म हम पंछी एक डाल के में उनके शानदार अभिनय को देखते हुये पूर्व प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने शानदार उपहार देकर सम्मानित किया था। जगदीप का जन्म 29 मार्च, 1939 को दतिया, मध्य प्रदेश में हुआ था। उनका असली नाम सैयद इश्तियाक अहमद जाफरी है। जावेद जफरी उनके बेटे हैं जो हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में अपनी एक अलग पहचान बना चुके हैं।

 

जगदीप ने निधन पर अजय देवगन ने ट्वीट कर उन्हें श्रद्धांजलि दी है। उन्होंने लिखा, जगदीप साहब के निधन के बारे में जानकर बहुत दुख हुआ। उन्हें स्क्रीन पर देखते हुए मैंने हमेशा एन्जॉय किया। वह ऑडियंस के लिए हमेशा खुशी लेकर आते थे। मेरी संवेदना जावेद और उनके परिवार के साथ है। जगदीप साहब की आत्मा के लिए प्रार्थना करें। इसके अलावा डायरेक्टर हंसल मेहता ने भी जगदीप को श्रद्धांजलि दी है। उन्होंने लोगों से अपील है कि वे जगदीप की फिल्म मुस्कुराहट देखें। इसमें उनके परफॉर्मेंस का कोई सानी नहीं है।

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