वो लेखक, जिसने देश की रक्षा करते हुए रखा गरीबों का ध्यान, अपनी सारी कमाई कर दी गरीबों के नाम

वो लेखक, जिसने देश की रक्षा करते हुए रखा गरीबों का ध्यान, अपनी सारी कमाई कर दी गरीबों के नाम

By: Aryan Paul
September 08, 16:09
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New Delhi:

वो लेखक जो अमीर होते हुए भी गरीबों की तरह जीना चाहता था, जिसने देश हित की खातिर सेना में भी नौकरी की और वो सेना में खाली समय मिलते ही किस्से-कहानियां लिखने में जुट जाता था। जिसकी महान रचना है Death of Evil. जिसने अपनी किताबों की कमाई से मिला सारा पैसा गरीबों-जरूरतमंदों के नाम कर दिया और जब उसका दुनिया को अलविदा कहने का समय आया, तो उसने आखिरी सांस भी गरीबों के बीच ही ली, जिन्हें वो अपने बहुत करीब मानता था। उस महान लेखक का नाम है लियो टॉलस्टॉय ।

लियो टॉलस्टॉय उन्नीसवीं सदी के सम्म्मानित लेखकों में से एक हैं, 9 सितंबर 1828 को मास्को से लगभग 100 मील दूर यासनाय पोलयाना में जन्मे टॉलस्टॉय के माता-पिता की  मौत बचपन में ही हो गई थी। उनकी चाची कात्याना ने उन्हें अच्छी तालीम दी, घुड़सवारी, शिकार, डांस में उनकी रुचि बचपन से ही थी। 1844 में लियो टॉलस्टॉय ने कजान विश्वविद्यालय में एडमिशन लिया और 1847 तक उन्होंने पूर्वी भाषाओं और कानून की पढ़ाई की। रियासत के बंटवारे पर बवाल होने के कारण ग्रेजुशन किए बिना ही विश्वविद्यालय छोड़ना पड़ा। रियासत में आकर इन्होंने किसानों के हालात सुधारने के लिए कई काम किए। 

1851 में लियो टॉलस्टॉय ने कुछ समय के लिए सेना ज्वाइन की। सेना में उनकी नियुक्ति कॉकेशस पर्वतीय कबीलों से होने वाली लंबे लड़ाई में हुई, जहां छुट्टी के दिन वे लिखने-पढ़ने में बिजी रहते। यहीं पर उन्होंने अपनी पहली स्टोरी चाईल्डहुड सन 1852 में लिखी, जो एलटी के नाम दि कंटपोरेरी नाम के लेख में प्रकाशित हुई। सन 1854 में लियो टॉलस्टॉय डेनयुग के मोर्चे पर भेजे गये। वहां से अपनी बदली उन्होंने सेबास्तोकोल में करा ली, जो क्रिमीयन युद्ध का सबसे तगड़ा मोर्चा था। यहां उन्हें युद्ध और युद्ध के संचालकों को पास से देखने का मौका मिला, इस मोर्चे पर वे अन्त तक रहे। इसी के कारण उनकी रचना सेबास्तोकोल स्केचेज 1855-56 में सामने आई । 

1855 में टॉलस्टॉय ने पिट्सबर्ग की यात्रा की जहां उन्हें साहित्यकारों ने बड़ा सम्मान दिया। 1857 और 1860-61 में इन्होंने पश्चिमी युरोप के विभिन्न देशों की यात्रा की। इसी यात्रा वापस आकर टॉलस्टॉय ने अपने गांव यासनाय पोलयाना में किसानों के बच्चों के लिए एक स्कूल खोला। स्कूल की ओर से गांव के ही नाम पर यासनाय पोलयाना नाम की एक पत्रिका भी निकलती थी। 

1862 में लियो टॉलस्टॉय ने साफिया बेहज नाम की एक काफी अमीर महिला से शादी की। उनकी शुरुआती मैरिज लाइफ अच्छी रही, लेकिन बाद का जीवन बड़ा कठिन बीता। सन 1863 से 1869 तक लियो टॉलस्टॉय War and Peace नाम से कहानी लिखने में बिजी रहे। 1873 से 1876 तक वे Anna Karenina की कहानी लिखने में वयस्त रहें। इन दोनों रचनाओं ने लियो टॉलस्टॉय की साहित्यिक ख्याति को बहुत उंचा उठाया। 1875 से 1879 तक के समय वे अपने सबसे मुश्किल दौर से गुजरे। इसी दौरान उनका भगवान से भरोसा उठ गया, और वे सुसाइड करने तक की सोचने लगे। 1878-79 में टॉलस्टॉय ने A Confession नाम की कंट्रोवर्सी कहानी लिखी। उनकी महान रचना The Death of Evil 1886 में प्रकशित हुई।

19वीं सदी का अन्त होते-होते टॉलस्टॉय ने गरीबों और असहायों के मदद के लिए काफी कुछ किया, उन्होंने अपनी रचनाओं से होने वाली सारी आय गरीबों को दान कर दी। अपनी पत्नी को उन्होंने सिर्फ परिवार के गुजारा होने भर के लिए ही पैसे लेने को कहा, बाकी सब गरीबों को दान करने को कह दिया। 1910 में उन्होंने अपने पैतृक गांव यसयाना पोलाना को हमेशा के लिए छोड़ने का फैसला किया। 22 नवंबर 1910 को अपनी यात्रा के दौरान ऐस्टापेावो में उनकी तबीयत खराब हो गई और वहीं वे दुनिया को अलविदा कह चले । 

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